अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश, UAPA सहित कई गंभीर धाराएँ लागू
HF News 24 डेस्क | रांची
झारखंड में संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रही बड़ी कार्रवाई के तहत आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने अमन साहू गैंग के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और रणनीतिकार माने जाने वाले मयंक सिंह के खिलाफ महत्त्वपूर्ण चार्जशीट दायर कर दी है। चार्जशीट में मयंक पर हत्या का प्रयास, फायरिंग की साजिश, हथियार तस्करी, रंगदारी वसूली, अपराधियों को विदेश से निर्देश देना तथा आतंकवाद विरोधी कानून UAPA सहित कई गंभीर धाराओं में आरोप लगाए गए हैं।
कई हाई-प्रोफाइल मामलों में मुख्य भूमिका
चार्जशीट के अनुसार मयंक सिंह झारखंड के चर्चित पतरातू डीएसपी फायरिंग केस और सरकारी अधिकारियों व उद्योगपतियों से रंगदारी मांगने की कई घटनाओं का मास्टरमाइंड रहा है। एटीएस की जांच में पता चला है कि मयंक वीडियो कॉल और इंस्टाग्राम कॉलिंग के माध्यम से विदेश से निर्देश देता था।
सूत्रों के अनुसार, गिरोह के पकड़े गए अन्य अपराधियों ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि सभी ऑपरेशन और हमले मयंक सिंह के आदेश पर किए जाते थे।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि मयंक लंबे समय तक भारत से बाहर रहकर अपराधात्मक नेटवर्क संचालित करता था।
वह मलेशिया, थाईलैंड और अज़रबैजान में छिपा हुआ था, जहाँ से वह:
- हथियार तथा गोला-बारूद की आपूर्ति
- अपराधियों के लिए धन का प्रवाह (हवाला रूट)
- सोशल मीडिया आधारित गुप्त संचार प्रणाली
चला रहा था।
विदेशी लोकेशन से जारी धमकी भरे संदेश और आदेश की रिकॉर्डिंग भी एटीएस के कब्जे में है।
प्रत्यर्पण के बाद हुई गहन पूछताछ
सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए मयंक का अज़रबैजान से प्रत्यर्पण कराया था, जिसके बाद उसे रांची लाया गया और अदालत ने ATS को रिमांड पर पूछताछ की अनुमति दी। जांच और डिजिटल सबूत मजबूत पाए जाने पर अब यह चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई है।
एटीएस अधिकारियों का कहना है कि:
“मयंक सिंह केवल एक अपराधी नहीं, बल्कि एक संगठित क्रिमिनल-नेटवर्क का बौद्धिक चेहरा था।”
UAPA सहित कई गंभीर धाराएँ
चार्जशीट में पुलिस ने IPC की कई धारा, आर्म्स एक्ट और UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) की धाराएँ लागू की हैं, जिसके बाद उसे सख्त सजा होने की संभावना जताई जा रही है। लागू धाराएँ अपराध IPC 307 हत्या का प्रयास 353 सरकारी कार्य में बाधा 120-B आपराधिक साजिश आर्म्स एक्ट अवैध हथियार UAPA 16/17/20 आतंक व वित्तीय सहायता
गैंग का नेटवर्क तोड़ने के प्रयास
एटीएस का कहना है कि चार्जशीट दायर होने के बाद अब:
- गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश तेज
- गिरोह की धन-संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया शुरू
- अपराध से जुड़े अन्य राज्यों व विदेशियों की पहचान सुनिश्चित
क्यों महत्वपूर्ण है यह केस?
- यह झारखंड का पहला मामला है जहाँ किसी अपराधी को विदेश से प्रत्यर्पित करके UAPA के तहत मुकदमा चल रहा है
- यह कदम राज्य में बढ़ते गैंग-राज और संगठित अपराध पर निर्णायक प्रहार माना जा रहा है
- प्रशासन ने इसको राज्य की सुरक्षा और निवेश-परिवेश सुधार हेतु बड़ी सफलता बताया है
HF News 24 का विश्लेषण
यह चार्जशीट केवल एक अपराधी पर कानूनी कार्रवाई नहीं— अपराधी तंत्र, हथियार तस्करी और आतंक नेटवर्क के खिलाफ आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्णायक संदेश है। राज्य में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले गिरोहों के लिए यह कड़ा चेतावनी है कि कानून के हाथ लंबे हैं, बच निकलना असंभव है।
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