खोरठा सिनेमा में गूंजेगा सामाजिक सच, ‘अन्याय का चेहरा, द रेपिस्ट’ की लक्ष्मी सिनेमा हॉल में धमाकेदार एंट्री


परदे पर आतंक बनकर उतरे बबलू मेहराअन्याय का चेहरा’ में खलनायकी से मचाएंगे हड़कंप

प्रबंध संपादक आलोक राज HF NEWS 24

दारू/हज़ारीबाग़ : खोरठा भाषा की बहुप्रतीक्षित सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म “अन्याय का चेहरा, द रेपिस्ट” सोमवार, 22 दिसंबर को आधिकारिक रूप से रिलीज़ होने जा रही है। रिलीज़ के साथ ही यह फिल्म लक्ष्मी सिनेमा हॉल में दर्शकों के लिए उपलब्ध होगी। फिल्म को लेकर क्षेत्र में खास उत्साह देखा जा रहा है, खासकर खोरठा सिनेमा प्रेमियों के बीच।

यह फिल्म समाज में बढ़ते अपराधों, अन्याय और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों को केंद्र में रखकर बनाई गई है। फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना और गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ सशक्त संदेश देना है। निर्देशक और निर्माता की टीम ने संवेदनशील विषय को जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि दर्शक कहानी से जुड़कर सोचने को मजबूर हों।

फिल्म की खास बात यह है कि इसमें मुख्य खलनायक की भूमिका फिल्म अभिनेता बबलू मेहरा निभा रहे हैं। बबलू मेहरा दारू प्रखंड के झुमरा निवासी हैं और उन्होंने भोजपुरी,हिंदी,खोरठा जैसे सिनेमा में अपनी  एक अलग पहचान बनाई है और अबतक बबलू मेहरा दर्जनों फिल्मों में भी अपना अभिनय कर चुके हैं। इस फिल्म में उनका सशक्त अभिनय दर्शकों को एक अलग अनुभव देने वाला है। स्थानीय कलाकार के रूप में उनकी मौजूदगी से दारू और आसपास के क्षेत्रों में फिल्म को लेकर विशेष उत्साह है।

फिल्म से जुड़े कलाकारों और टीम का मानना है कि खोरठा भाषा में बनी यह फिल्म स्थानीय संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को मजबूती से दर्शाती है। इससे क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय कलाकारों को आगे बढ़ने का अवसर भी मिलेगा।

रिलीज़ को लेकर लक्ष्मी सिनेमा हॉल में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। फिल्म प्रेमियों और स्थानीय लोगों में फिल्म देखने को लेकर भारी उत्सुकता है। उम्मीद की जा रही है कि “अन्याय का चेहरा, द रेपिस्ट” न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करेगी, बल्कि समाज में सकारात्मक चर्चा और जागरूकता भी पैदा करेगी।

वहीं दूसरी ओर, यह फिल्म खोरठा भाषा के संरक्षण और प्रचार की दिशा में भी एक अहम प्रयास मानी जा रही है। वर्तमान समय में खोरठा भाषा के धीरे-धीरे विलुप्त होने की चिंता को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने इसी भाषा में फिल्म बनाकर एक मजबूत संदेश देने का काम किया है। इससे न केवल नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का प्रयास किया गया है, बल्कि खोरठा संस्कृति, बोली और लोकभावनाओं को भी बड़े परदे पर सम्मान मिला है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की फिल्में खोरठा भाषा को जीवित रखने और उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Editor-in-Chief: Pankaj Hindustani


https://chat.whatsapp.com/GPVSxk0fZqiBY2yKPTZsed?mode=ems_copy_t

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *