न मंच था, न भाषण… बस एक थाली और बहुत सारी इंसानियत — सेवा ही धर्म है
हजारीबाग में मानवता की मिसाल पेश करते हुए सड़क पर बैठे एक लाचार वृद्ध को बैठाकर भोजन कराया गया। वर्षों से चल रही इस सेवा पहल के तहत असहायों का दर्द देखा नहीं जाता, बल्कि उसे साझा कर राहत पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

