झारखंड पुलिस को मिला नया नेतृत्व : तदाशा मिश्रा बनीं प्रभारी DGP, अनुराग गुप्ता का इस्तीफ़ा स्वीकार

बोकारो की पूर्व एसपी के नाम से खौफ खाते थे अपराधी — आनंद सिंह एनकाउंटर अब भी याद है

🖋️ पंकज हिन्दुस्तानी, मुख्य संपादक | HF NEWS 24
📅 07 नवंबर 2025

रांची ।  झारखंड सरकार ने गुरुवार की देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए  राज्य की प्रभारी डीजीपी के रूप में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति की है। उन्होंने अनुराग गुप्ता की जगह ली है, जिनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया है।

तदाशा मिश्रा वर्तमान में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर थीं। वे 2003 में  बोकारो की एसपी रह चुकी हैं और अपने सख्त रुख एवं अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए चर्चित रही हैं।

🔹 “आयरन लेडी” की पहचान: बोकारो को अपराधमुक्त बनाने का दावा

2003 में बोकारो की कमान संभालते ही मिश्रा ने अपराध पर ऐसा शिकंजा कसा कि अपराधियों में उनके नाम का खौफ बैठ गया।
उस दौर में रंगदारी, हत्या और अपहरण की घटनाएं चरम पर थीं। लेकिन मिश्रा की रणनीति और फील्ड एक्शन के चलते आधा दर्जन से अधिक कुख्यात अपराधियों का एनकाउंटर हुआ और जिले में लंबे समय तक शांति कायम रही।


🔹 आनंद सिंह एनकाउंटर: जिसने पूरे झारखंड को हिला दिया

मिश्रा के कार्यकाल का सबसे चर्चित प्रकरण था आनंद सिंह एनकाउंटर, जिसने झारखंड पुलिस की छवि को नई धार दी।
सूत्रों के अनुसार, धनबाद के बरटांड स्थित मधुलिका स्वीट्स में कुख्यात अपराधी आनंद सिंह के छिपे होने की सूचना मिली थी।
मिश्रा ने तत्काल धनबाद एसपी मुरारीलाल मीणा से संपर्क कर संयुक्त अभियान शुरू किया।
शाम करीब 6:30 बजे आनंद सिंह जैसे ही एक लाल मारुति वैन से पहुंचा, सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे आत्मसमर्पण का मौका दिया। लेकिन उसने पिस्तौल निकालने की कोशिश की — जवाबी फायरिंग में वह मौके पर ही ढेर हो गया।

🔹 अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर विवाद

पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई थी।
महालेखाकार द्वारा उनका वेतन रोके जाने के बाद मामला अदालत में लंबित हो गया।
सरकार ने संवैधानिक अड़चनों से बचने के लिए अब कमान एक ऐसे अधिकारी के हाथ में दी है, जिनका **रिकॉर्ड साफ़-सुथरा और एक्शन-ओरिएंटेट माना जाता है।

🔹 अपराधियों में फिर बढ़ा डर, पुलिस में उत्साह

राज्य के पुलिस महकमे में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से उत्साह का माहौल है।
अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं।
कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से झारखंड पुलिस को एक “सख्त लेकिन संवेदनशील” नेतृत्व मिला है।


📌 HF NEWS 24 का विश्लेषण:
झारखंड पुलिस को तदाशा मिश्रा के रूप में एक बार फिर फील्ड में सक्रिय, जन-संवेदनशील और निडर अफसर मिला है।
उनकी कार्यशैली अपराध पर नकेल कसने के साथ-साथ सिस्टम को अनुशासन में लाने के लिए जानी जाती है।

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