HF News 24 | हजारीबाग
हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा (Central Jail) से 31 दिसंबर 2025 की रात भागे गए तीन कैदियों को हज़ारीबाग पुलिस ने लगभग 10 दिनों के भीतर महाराष्ट्र के सोलापुर से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक जबरदस्त पुलिस सघन अभियान, तकनीकी निगरानी और पड़ोसी राज्यों के साथ ऐतिहासिक समन्वय का परिणाम है।
घटना शुरू हुई थी जब 31 दिसंबर की रात लगभग 01:30 बजे सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के कारण तीन कैदी चुपके से भागने में सफल रहे थे। इस जेल से फरार होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उभारने वाला मामला बन गया था और फरारियों की खोज के लिए उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई थी।
कैदियों की पहचान और प्राथमिकी कड़ी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार जिन तीन कैदियों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी पहचान इस प्रकार है:
- देवा भुइँया (20 वर्ष)
- राहुल रजवार (27 वर्ष)
- शिवन रवानी — जिसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी
इन तीनों कैदियों को विभिन्न आपराधिक मामलों में सजा काटते हुए जेल में रखा गया था। शिवन रवानी जैसे कैदी को आजीवन कारावास की सजा होने के बावजूद जेल से भागने में सफलता मिली, इससे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल उठने लगे।
कैसे हुआ भागना — घटनाक्रम का चौंकाने वाला मोड़
प्रारंभिक जांच के अनुसार, तीनों कैदियों ने वे एक विषम योजना के तहत जेल से भागने की कोशिश की थी:
- सबसे पहले उन्होंने जेल की खिड़की के रॉड काटे और अपने बिस्तर की चादर तथा बेडशीट का सहारा लिया।
- इसके बाद उन्होंने जेल की आंतरिक दीवार को पार कर गौशाला की ओर रुख किया।
- गौशाला से वे बाहर निकले और फिर एकत्रित साधनों की सहायता से बाहरी दीवार को पार करने में सफलता प्राप्त की।
यह भागने की योजना अत्यंत सावधानीपूर्वक बनाई गई थी, जिससे सामूहिक रूप से दीवार को पार कर सड़क तक पहुंचने में सफल रहे।
फरारियों की खोज में सघन पुलिस अभियान
जेल से फरारी की पुष्टि होते ही हजारीबाग पुलिस ने तुरंत विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। यह टीम प्रतिदिन निगरानी, तकनीकी सबूत और गवाहों के बयान इकट्ठे कर रही थी। इस अभियान में शामिल थे:
- स्थानीय पुलिस
- तकनीकी निरीक्षण दल
- क्षेत्रीय साक्ष्य विश्लेषक
- पड़ोसी जिलों की पुलिस
पुलिस ने न केवल हजारीबाग के आस-पास, बल्कि दूरदराज के जिलों में भी दबिश दी। धनबाद, रांची, गिरिडीह, कोडरमा और बिहार की सीमा क्षेत्र में पुलिस की सतर्कता बढ़ाई गई।
जांच में यह पता चला कि त्रिविक्रम, पार्क परिसरों से भागने के बाद ये आरोपित टोटो और लोकल परिवहन का उपयोग करके बरकट्ठा होते जाते रहे, फिर कोडरमा के रास्ते आगे बढ़े।
रेलमार्ग से महाराष्ट्र तक का सफर
पुलिस के मुताबिक तीनों कैदी उज्जैन, सुल्तानगंज या जसीडीह रेलवे स्टेशनों के मार्ग से ट्रेन में सवार होकर महाराष्ट्र की दिशा में गए थे।
- हजारीबाग से प्रारंभ
- बरही होते हुए कोडरमा
- जसीडीह
- फिर ट्रेन से महाराष्ट्र
6 जनवरी तक यह समूह महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के करमाला थाना क्षेत्र के कोरटी इलाके तक पहुंच गया, जहाँ तीनों ने एक ईंट भट्ठा मालिक के साथ कार्य करते हुए छिपने की कोशिश की।
महाराष्ट्र पुलिस के साथ त्वरित समन्वय
हजारीबाग पुलिस द्वारा महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से सघन निगरानी और ट्रैकिंग शुरू की गई। तकनीकी सहायता, मोबाइल लोकेशन डेटा, रेलवे रिकॉर्ड और स्थानीय नेटवर्क का उपयोग करते हुए पुलिस को यह सफलता मिली कि तीनों आरोपित लगभग 10 दिनों के भीतर सोलापुर स्थित कोरटी भट्ठा से पकड़ लिए गए।
यह गिरफ्तारी बुनियादी सूचना, साझा अंतरराज्यीय निगरानी तथा क्रॉस-स्टेट कॉर्डिनेशन का अनुपम उदाहरण बन गई है।
गिरफ्तारी के बाद की कार्यवाही
तीनों आरोपितों को तुरंत जेल प्रशासन के हवाले कर दिया गया है। उन पर अब अतिरिक्त धाराएँ शामिल की जा रही हैं, जिनमें—
✔ जेल से भागने का प्रयास
✔ केंद्रीय कारा सुरक्षा भंग
✔ भागना तथा अग्रिम सुरक्षा व्यवस्था विफलता
जेल प्रशासन और पुलिस विभाग का कहना है कि इस तरह की किसी भी भेद्यता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
यह घटना राज्य और केंद्र शासित संस्थाओं की सुरक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। ऐसा पहली बार नहीं है कि इस जेल से कैदी भागे हैं — छह महीने पहले भी इसी जेल से तीन कैदी फरार हुए थे और बाद में गिरफ्तार किए गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि जेल सुरक्षा में कई स्तरों पर समीक्षा करने की आवश्यकता है:
🔹 CCTV कवरेज
🔹 सिक्योरिटी गार्ड रोटेशन
🔹 दीवारों की मजबूती
🔹 इंटेरीयर रडार एवं सेंसर
🔹 पहरेदारों की तैनाती व प्रशिक्षण
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया
हजारीबाग पुलिस अधीक्षक ने कहा:
“हम मामले की गंभीरता को समझते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के हर पहलू की समीक्षा की जा रही है और इसके लिए सुधारात्मक कदम जल्द लागू किए जाएंगे। इस घटना से सीखे गए सबक को ध्यान में रखते हुए भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि जनता और नागरिकों के सहयोग से ही ऐसे मामलों में सफलता मिलती है।
HF News 24 का विश्लेषण
यह गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधियों की पकड़ नहीं, बल्कि अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय, तकनीकी निगरानी और सघन अनुसंधान का उदाहरण है।
एक तरफ जहां जेल सुरक्षा की खामी पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई यह दिखाती है कि आधुनिक समय में आरोपी चाहे कितनी भी योजना बनाएं, सुधरे हुए पुलिस नेटवर्क और निरंतर दबाब के आगे टिक नहीं सकते।
यह मामला एक सीख भी देता है कि सुरक्षा व्यवस्था में नियमित ऑडिट व तकनीकी अपडेट अत्यंत जरूरी हैं — खासकर केंद्रीय जेल जैसे संस्थानों में।
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