पूर्व DC विनय चौबे, कारोबारी विनय सिंह व पूर्व CO शैलेश कुमार भी आरोपित
HF News 24 | हजारीबाग ब्यूरो | एक्सक्लूसिव स्पेशल रिपोर्ट
हजारीबाग में वन-भूमि की अवैध खरीद-बिक्री और फर्जी म्यूटेशन के बड़े घोटाले में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने सख्त रुख अपनाते हुए चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई कांड संख्या 11/2025 के तहत की गई है, जिसमें पूर्व हजारीबाग डीसी IAS विनय कुमार चौबे, ऑटोमोबाइल कारोबारी विनय सिंह, सदर अंचल के पूर्व CO शैलेश कुमार सहित 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
ACB द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है, और कई जगह की गई कानूनी कार्रवाई से जिले में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
ACB SP आरिफ एकराम ने मीडिया से कहा:
“जो भी लोग इस मामले में नामजद हैं, वे कानून से बच नहीं पाएंगे। सभी को गिरफ्तार किया जाएगा और जांच निष्पक्ष व पारदर्शी होगी।”
ACB की इस कड़ी कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और जांच एजेंसियाँ अब राज्य की भूमि और वन संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर शून्य-सहनशीलता नीति (Zero Tolerance) पर काम कर रही हैं।
क्या है मामला — कैसे हुआ वन-भूमि घोटाला
यह पूरा प्रकरण उन जमीनों से संबंधित है, जिनका रिकॉर्ड वन भूमि (Forest Land) के रूप में दर्ज था।
कानून के अनुसार ऐसी जमीन को बेचना, म्यूटेशन करना, जमाबंदी देना या व्यावसायिक उपयोग में लाना — बिना केंद्र सरकार की विधिवत मंजूरी के अवैध है।
इसके बावजूद, आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों, दलालों और निजी कारोबारियों के एक संगठित नेटवर्क ने—
- फर्जी कागजात बनवाए
- वन-भूमि को सामान्य जमीन दिखाया
- गलत तरीके से म्यूटेशन कराया
- और बाद में उसे मनचाहे दामों पर बेच दिया
इस घोटाले की वित्तीय राशि कई करोड़ बताई जा रही है, और जांच एजेंसियों का दावा है कि अभी और बड़े खुलासे होने बाकी हैं।

ACB की अब तक की कार्रवाई
पिछले दो महीनों में, ACB ने—
- कई रिकॉर्ड रूम, रजिस्ट्री ऑफिस, बैंक और आवासीय स्थानों पर रेड / दस्तावेज जब्त
- भूमि-दस्तावेज, नक्शा-म्यूटेशन रिकॉर्ड और डिजिटल फाइलें कब्जे में लीं
- मुख्य रूप से शामिल लोगों के बैंक लेनदेन की फॉरेंसिक जांच शुरू की
- राजनीतिक और प्रशासनिक संबंधों वाले कई चेहरों की पहचान की
और अब, नए चरण में चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है। हिरासत में लिए गए नाम हैं—
हिरासत में आरोपी
नाम पता स्थिति इंद्रदेव साव शिवपुरी पूछताछ जारी जयप्रकाश यादव शिवपुरी हिरासत शशि शेखर बभनवै हजारीबाग हिरासत चारु प्रजापति मुकुंदगंज हिरासत
इसके अलावा हाजी कलाम (बकसपुरा) से भी पूछताछ जारी है।
मुख्य बड़े आरोपी
नाम पद / पहचान स्थिति IAS विनय कुमार चौबे पूर्व DC हजारीबाग केस में नामजद, जमानत मुद्दा चर्चा में विनय सिंह ऑटोमोबाइल व्यवसायी पूर्व में गिरफ्तार, पुन: पूछताछ लंबित शैलेश कुमार पूर्व CO, सदर अंचल आरोपित और जांच के दायरे में
इस मामले में आरोपी संख्या अभी 73 नामजद और दर्जनों अज्ञात शामिल हैं।
कानूनी पेंच — इतनी बड़ी सख्ती क्यों
Forest Conservation Act, Indian Forest Act और Land Revenue नियमों के मुताबिक—
- किसी भी वन भूमि को निजी स्वामित्व में बदलना अपराध है
- म्यूटेशन कर जमीन बेचने वालों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, कागज़ात फॉरजरी जैसी गंभीर धाराएँ लगती हैं
- दोषी पाए जाने पर 7 से 10 वर्ष तक की सजा संभव
इस वजह से यह सिर्फ जमीन घोटाला नहीं — बल्कि सरकारी प्रणाली पर हमला और सार्वजनिक संसाधनों की लूट माना जा रहा है।
जनता और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई को लेकर जनता में दो तरह की प्रतिक्रिया है—
- राहत और उम्मीद: लोग खुश हैं कि वर्षों से जमीन के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले आज गिरफ्तार हो रहे हैं
- न्याय की मांग: पर्यावरण और समाजसेवी समूहों ने कहा — “यह केवल शुरुआत है। अब छोटे-बड़े सभी दलालों व अधिकारियों को बेनकाब किया जाना चाहिए।”
सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि वन भूमि सिर्फ काग़ज़ की संपत्ति नहीं — यह पीढ़ियों का प्राकृतिक अधिकार है, जिसे बचाने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है।
आगे क्या — अगली कार्रवाई की दिशा
ACB बड़ी स्तर पर जमीन रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और कॉल-डेटा विश्लेषण कर रही है।
सूत्रों के अनुसार—
- जल्द ही और गिरफ्तारियाँ होंगी
- 20 से ज्यादा संदिग्धों को नोटिस भेजने की तैयारी
- बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों की भूमिका भी जांच में आ सकती है
अधिकारियों ने साफ कहा है:
“भ्रष्टाचार का कोई रंग नहीं — चाहे वो सत्ता का हो या सत्ता से बाहर का। कानून के सामने सब बराबर हैं।”
निष्कर्ष
हजारीबाग में वन भूमि घोटाले के तहत हुई यह कार्रवाई झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था, भूमि संरक्षण और भ्रष्टाचार विरोधी ढांचे के लिए टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है।
यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं — बल्कि एक मजबूत संदेश है कि अब सरकारी भ्रष्टाचार और प्राकृतिक संपदा की तस्करी पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
अगर जांच अपने तार्किक अंत तक पहुँचती है, तो यह केस झारखंड की भूमि राजनीति और सरकारी संरचना की कमजोरियों को उजागर करेगा—
और भविष्य में ऐसे घोटालों पर लगाम लगाने का मार्ग दिखाएगा।
अब सभी की निगाहें ACB की अगली कार्रवाई और न्यायालयों की मुकदमे की दिशा पर टिकी हैं।
रिपोर्ट: HF News 24 डेस्क
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