समाजसेवी अभिषेक कुमार ने पुष्पगुच्छा अर्पित कर किया सम्मान, पूर्व मुख्यमंत्री के.बी. सहाय की 128वीं जयंती पर भावुक क्षण
HF NEWS 24 | हजारीबाग — संवाददाता रिपोर्ट
हजारीबाग की धरती ने 31 दिसंबर 2025 को इतिहास, संघर्ष, राजनीति, समाज और जनचेतना — इन सभी भावनाओं को एक साथ जीते हुए देखा।
इस दिन—संयुक्त बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक न्याय के पुरोधा कृष्ण बल्लभ सहाय (K.B. Sahay) की 128वीं जयंती अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और गौरवपूर्ण तरीके से मनाई गई।
कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति रही —
झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह,
जिन्होंने के.बी. सहाय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इसी दौरान चर्चित युवा समाजसेवी अभिषेक कुमार ने मंत्री का पुष्पगुच्छा देकर सम्मान किया तथा के.बी. सहाय के चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया — यह क्षण वहाँ मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के लिए भावुक और गर्वपूर्ण रहा।
के.बी. सहाय — वह नाम जिसने इतिहास नहीं, असल राजनीति गढ़ी
31 दिसंबर 1898 को जन्मे कृष्ण बल्लभ सहाय — बिहार-झारखंड की राजनीति के ऐसे स्तंभ रहे जिनका जीवन सिर्फ सत्ता पर आधारित नहीं था, बल्कि जनता के हक़, अधिकार, सम्मान और समानता के संघर्ष पर टिका था।
3 जून 1974 को उनका निधन हालांकि उनके भौतिक अध्याय का अंत था —
लेकिन उनकी विचारधारा आज भी जीवित है।
उनकी 128वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के केंद्र में केवल भाषण नहीं — इतिहास के प्रति वह भावनात्मक कृतज्ञता थी, जो अक्सर आधुनिक राजनीति की भीड़ में खो जाती है।
कार्यक्रम का आयोजन — एक सादगी भरा लेकिन प्रभावपूर्ण समारोह
जयंती कार्यक्रम का आयोजन आशीष सहाय वनसज, स्वर्गीय के.बी. सहाय के सुपुत्र द्वारा किया गया।
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत थी—सादगी और सच्चा सम्मान, जिसमें जोर दिखावे की बजाय विचारों और स्मरण पर दिया गया।
केबी साहब पार्क परिसर में सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था।
वृद्ध, युवा, महिलाएँ, बच्चे — हर वर्ग का प्रतिनिधित्व वहाँ मौजूद था।
यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि इतिहास का सम्मान केवल राजनीति नहीं —
एक जनमानस का संस्कार है।
मंत्री दीपिका पांडे सिंह — स्वागत और सम्मान
कार्यक्रम में मंत्रियों और अतिथियों का आना सामान्य बात है —
किन्तु आज का दृश्य अलग था।
यह स्वाभाविक भीड़ नही —
एक सच्चे स्वागत की भावना थी।
जैसे ही मंत्री दीपिका पांडे सिंह पार्क परिसर पहुँचीं —
लोगों ने तालियों से स्वागत किया।
उनके आगमन के साथ, समाजसेवी अभिषेक कुमार आगे बढ़े —
और पुष्पगुच्छा भेंट कर सम्मान अर्पित किया।
उनके द्वारा संयत, विनम्र भाव से किया गया यह सम्मान —
वहाँ उपस्थित भीड़ में एक संदेश छोड़ गया —
कि राजनीति और समाज की कड़ी तब मजबूत होती है —
जब युवा और नेतृत्व एक-दूसरे को सम्मानपूर्वक स्वीकारते हैं।
मंत्री का संदेश — “युवा पीढ़ी सीख ले, के.बी. सहाय विचार हैं – इतिहास नहीं”
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा:
“के.बी. सहाय जैसे नेताओं ने राजनीति को पेशा नहीं,
समाज को सुधारने का माध्यम माना था।
उनकी राह पर चलना —
आज के युवा और नेताओं दोनों के लिए ज़िम्मेदारी है।”
उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि
जब देश का भविष्य तय करने वाले युवा उदासीन हो जाते हैं,
तब राजनीति खोखली और समाज दिशाहीन हो जाता है।
सर्किट हाउस में अभिषेक कुमार की पहल — प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान
जयंती के बाद मंत्री सर्किट हाउस पहुँचीं —
और यहीं हुआ वह महत्वपूर्ण संवाद जो इस दिन को खास और जरूरी बनाता है।
युवा समाजसेवी अभिषेक कुमार ने मंत्री को एक लिखित आवेदन सौंपा,
जिसमें उन्होंने अत्यंत गंभीर चिंताएँ उठाईं —
- ग्रामीण क्षेत्रों की हालत बेहद दयनीय
- अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी
- दवाइयों की अनुपलब्धता
- गर्भवती महिलाओं, गरीब व बुजुर्ग मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं
- स्वास्थ्य सेवाएँ भवनों में कैद — जनता तक नहीं
अभिषेक कुमार ने स्पष्ट कहा:
“अस्पताल होना ही स्वास्थ्य-प्रणाली नहीं है।
वहाँ सेवा हो, संवेदना हो, समय पर दवाई मिले —
वही असली स्वास्थ्य व्यवस्था है।
और अभी — यह सब गायब है।”
उनकी यह बात सुनकर hall में सन्नाटा छा गया —
क्योंकि यह सच्चाई वहाँ मौजूद हर ग्रामीण के मन से निकली आवाज़ थी।
मंत्री ने आवेदन पढ़ते हुए कहा:
“मुद्दा वास्तविक है।
मैं तुरंत संज्ञान ले रही हूँ —
और विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट और कार्रवाई दोनों की अपेक्षा है।”
उपस्थित जनमानस — भावनाएँ, दर्द और उम्मीद
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, युवा संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएँ और बच्चों की मौजूदगी रही।
सबके चेहरे पर भावनाओं का मिश्रण था —
इतिहास का सम्मान भी
और भविष्य की चिंता भी।
कुछ बुजुर्गों ने HF NEWS 24 से कहा —
“के.बी. सहाय जैसे नेता आज होते —
तो अस्पताल ऐसे नहीं होते…
गरीब ऐसे नहीं मरते।”
वहीं युवा वर्ग ने भी कहा —
“अभिषेक भाई जैसे लोग ही हमारी आवाज़ उठा रहे हैं —
अगर मंत्री सुनेंगी — उम्मीद जगी है।”
सामाजिक अर्थ — जयंती केवल तिथि नहीं, ज़िम्मेदारी है
आज का दिन केवल एक कार्यक्रम नहीं था —
यह एक दर्पण था —
जो हमें दिखा गया कि इतिहास ने हमें क्या दिया
और आज हम उसे किस रूप में सँजो रहे हैं।
के.बी. सहाय की जयंती पर हमने:
- संघर्ष को याद किया
- समाज को देखा
- और भविष्य के लिए आवाज़ भी उठाई
शायद यही — किसी जयंती का असली उद्देश्य होना चाहिए।
HF NEWS 24 — निष्कर्ष
31 दिसंबर 2025
हजारीबाग के इतिहास में याद रखा जाएगा —
क्योंकि आज
इतिहास ने भविष्य से हाथ मिलाया।
एक ओर
पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति श्रद्धा —
दूसरी ओर
आवाम की समस्याएँ सरकार तक लिखित शब्दों में पहुँचाईं गईं।
यह दिन यह कहता है —
कि कभी-कभी
एक फूल —
एक आवेदन —
और एक सच्ची बातचीत —
समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।
✍️ रिपोर्ट — HF NEWS 24 https://chat.whatsapp.com/GPVSxk0fZqiBY2yKPTZsed?mode=ems_copy_t






