ED समन अवहेलना मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रांची एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी


दो मुचलका दाखिल, अगली सुनवाई 12 दिसंबर को

HF News 24 | रांची ब्यूरो | विस्तृत विशेष रिपोर्ट

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शनिवार को रांची स्थित MP-MLA विशेष अदालत में पेश हुए। यह पेशी ED समन अवहेलना (Enforcement Directorate Summons Violation) मामले से जुड़ी है। हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद सीएम सोरेन को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसके बाद आज उनकी अदालत में पेशी हुई। अदालत में सोरेन के साथ राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) राजीव रंजन और वरिष्ठ अधिवक्ता टीम भी मौजूद रही।

कोर्ट में पहुंचने पर सीएम सोरेन ने दो मुचलके (बेल बॉन्ड) दाखिल किए, जिनकी राशि ₹7,000-₹7,000 थी। अदालत ने पेशी स्वीकार की और इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर के लिए निर्धारित कर दी। अब यह देखा जाएगा कि आने वाली सुनवाई में अदालत उन्हें आगे की तारीखों पर व्यक्तिगत पेशी से राहत देती है या मामला सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।


मामले की पृष्ठभूमि — कैसे शुरू हुआ विवाद

ED ने सीएम सोरेन को 2023-2024 के बीच भूमि घोटाला / जमीन कब्जा और मनी-लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित कई समन भेजे थे।
ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री को 10 से अधिक समन जारी किए गए, लेकिन वे केवल दो बार ही पेश हुए, जबकि अन्य समनों का पालन नहीं किया गया, जिसे कानून के तहत समन अवहेलना और बाधा उत्पन्न करने की श्रेणी में माना जाता है।

इस मामले में MP-MLA विशेष अदालत पहले ही सुनवाई कर रही थी, लेकिन कुछ समय पहले अदालत ने सोरेन को व्यक्तिगत उपस्थिति से अस्थायी राहत दी थी। बाद में ED ने इस राहत को चुनौती दी और मामला झारखंड हाईकोर्ट में पहुंचा।
3 दिसंबर को हाईकोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा दी गई राहत वापस ले ली, और आदेश दिया कि सीएम को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा


शनिवार की पेशी — अदालत के भीतर क्या हुआ

अदालत में दर्ज प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, सीएम सोरेन ने अपने वकीलों के माध्यम से अदालत से नियमित हाजिरी से छूट देने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि मुख्यमंत्री होने के नाते उनके पद की जिम्मेदारियाँ निरंतर उपस्थित होने की अनुमति नहीं देतीं। अदालत ने इस पर विचार करते हुए सुनवाई को अगली तारीख 12 दिसंबर के लिए निर्धारित किया है।

अदालत कक्ष में मौजूद सूत्रों के अनुसार:

“अदालत ने कहा है कि जमानत आवेदन और व्यक्तिगत उपस्थिति छूट आवेदन पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।”

इस बीच कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी थी, और पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई थी क्योंकि राज्य के भीतर इस मामले के राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।


राजनीतिक महत्व — क्यों बढ़ा तनाव

एक सिटिंग मुख्यमंत्री का किसी आपराधिक जांच से जुड़े मामले में अदालत में पेश होना, राजनीतिक दृष्टि से भारी महत्व रखता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस सुनवाई का परिणाम आने वाले महीनों में झारखंड की राजनीति की दिशा बदल सकता है।

विपक्षी दलों ने इस मामले को भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से जोड़कर मुख्यमंत्री पर इस्तीफे का दबाव बढ़ाने की कोशिश की है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन का कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश और बदले की कार्रवाई का उदाहरण है।

एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने टिप्पणी में कहा:

“इस मामले का असर केवल कानूनी प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि राज्य सरकार की स्थिरता और आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।”


कोर्ट परिसर में माहौल

कोर्ट के बाहर समर्थक और विरोधी दोनों मौजूद थे।
कुछ समर्थकों ने नारे लगाए —
“हमारे नेता निर्दोष हैं”,
जबकि विरोधी पक्ष ने करप्शन-फ्री गवर्नेंस की मांग उठाई।

पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों की भी बड़ी संख्या अदालत परिसर में मौजूद थी, क्योंकि यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


12 दिसंबर — अगली सुनवाई में क्या हो सकता है

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार 12 दिसंबर को कोर्ट निम्न बिंदुओं पर फैसला दे सकती है:

  • क्या आगे की सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी?
  • क्या सीएम की याचिका के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग / वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व की अनुमति दी जाएगी?
  • क्या अदालत इसे सामान्य ट्रायल के रूप में आगे बढ़ाएगी?
  • या मामला हाईकोर्ट में फिर चुनौती दिया जाएगा?

अगर मामला आगे सख्ती के साथ चलता है, तो अगली सुनवाई राज्य की राजनीति पर बड़े प्रभाव डाल सकती है।


निष्कर्ष

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की MP-MLA कोर्ट में यह पेशी केवल एक न्यायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि झारखंड की लोकतांत्रिक, राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखी जा रही है।

यह मामला उस सिद्धांत को मजबूती देता है कि —

कानून सभी के लिए एक समान है — चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा पद क्यों न रखता हो।

अब सबकी निगाहें 12 दिसंबर पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि केस किस दिशा में आगे बढ़ेगा।


रिपोर्ट : HF News 24 डेस्क
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