शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ‘अवैध वसूली’ पर बड़ा एक्शन, सांसद मनीष जायसवाल की सख्ती से मचा हड़कंप


अधीक्षक ने जारी किया कड़ा आदेश

✍️ Alok Raj |  Managing Editor |  HF News 24 | हजारीबाग

हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों से कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली के खुलासे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में हड़कंप मच गया है। गरीब और जरूरतमंद मरीजों से डिस्चार्ज और भर्ती प्रक्रिया के नाम पर मनमानी वसूली की शिकायतें सामने आने के बाद यह मामला अब सीधे सांसद मनीष जायसवाल के संज्ञान में पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी।

सांसद के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया और प्रभारी सुपरीटेंडेंट डॉ. राजकिशोर ने अधीक्षक कार्यालय की ओर से सख्त आदेश जारी करते हुए अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है, तो दोषी कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।


डिस्चार्ज स्लिप के नाम पर वसूली, गरीब मरीजों की मजबूरी का फायदा

मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल के कई वार्डों में मरीजों को डिस्चार्ज स्लिप देने के बदले 100 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही थी। यह वसूली न केवल नकद रूप में, बल्कि फोन-पे और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी ली जा रही थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कार्य सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था।

बताया जा रहा है कि जिन मरीजों या उनके परिजनों ने पैसे देने से इनकार किया, उन्हें जानबूझकर डिस्चार्ज स्लिप देने में देरी की गई या फिर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। यह स्थिति विशेष रूप से उन गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए अत्यंत पीड़ादायक थी, जो इलाज के लिए पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।


आईपीडी स्लिप में भी मनमानी, सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन

केवल डिस्चार्ज ही नहीं, बल्कि अस्पताल में भर्ती (IPD) स्लिप के मामले में भी अनियमितता सामने आई है। नियमानुसार जहां आईपीडी स्लिप का निर्धारित शुल्क 15 रुपये है, वहीं कथित तौर पर मरीजों से 20 रुपये वसूले जा रहे थे

यह सीधा-सीधा सरकारी नियमों और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। जानकारों का कहना है कि छोटी-छोटी रकम भले ही कम लगती हो, लेकिन जब यह रोजाना सैकड़ों मरीजों से वसूली जाती है, तो यह एक संगठित अवैध वसूली का रूप ले लेती है।


सांसद मनीष जायसवाल ने लिया सख्त संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर जनता से एक रुपया भी अवैध रूप से वसूला जाना अस्वीकार्य है

सांसद के निर्देश पर उनके हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने पूरे मामले को प्रभारी सुपरीटेंडेंट डॉ. राजकिशोर के समक्ष रखा और तत्काल कार्रवाई की मांग की।

रंजन चौधरी ने कहा कि—

“अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का फायदा कुछ कर्मचारी उठा रहे हैं। मरीजों की मजबूरी और संवेदनाओं को नजरअंदाज कर निजी कमाई को प्राथमिकता देना बेहद शर्मनाक है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”


सोशल मीडिया पर भी सांसद का स्पष्ट संदेश

सांसद मनीष जायसवाल ने स्वयं अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से भी इस मुद्दे पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ लिखा कि—

“जनता से अवैध वसूली किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकारी अस्पताल का उद्देश्य सेवा है, न कि लूट।”

उनके इस सार्वजनिक बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया।


अधीक्षक कार्यालय का सख्त आदेश, सभी वार्डों को चेतावनी

सांसद के हस्तक्षेप के बाद शनिवार को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रभारी सुपरीटेंडेंट डॉ. राजकिशोर ने अधीक्षक कार्यालय की ओर से लिखित आदेश जारी किया।

आदेश पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि—

“प्रायः शिकायत प्राप्त होती है कि वार्ड में कार्यरत नर्स या वार्ड बॉय द्वारा भर्ती मरीज के डिस्चार्ज के समय पैसे की मांग की जाती है और पैसे नहीं देने पर डिस्चार्ज स्लिप नहीं दी जाती, जो अत्यंत खेदजनक विषय है।”

आदेश में सभी विभागाध्यक्षों, मेट्रोन और वार्ड इंचार्ज को निर्देश दिया गया है कि इस प्रकार की किसी भी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए, अन्यथा संबंधित कर्मियों के खिलाफ नियमानुकूल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


आदेश की प्रतिलिपि सभी संबंधित अधिकारियों को

अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि—

  • सभी विभागाध्यक्षों
  • मेट्रोन
  • सभी वार्ड इंचार्ज

को सूचनार्थ एवं अनुपालन हेतु भेजी गई है, ताकि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।


जनता में संतोष, लेकिन निगरानी की मांग

इस कार्रवाई के बाद मरीजों और आम जनता में कुछ हद तक राहत और संतोष देखने को मिला है। हालांकि, कई सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी नियमित निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत करना जरूरी है।

लोगों की मांग है कि—

  • अस्पताल में हेल्पलाइन या शिकायत बॉक्स की व्यवस्था हो
  • मरीजों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि कौन-सी सेवाएं निःशुल्क हैं
  • दोषियों पर की गई कार्रवाई को सार्वजनिक किया जाए

HF News 24 विश्लेषण

शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आया यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती को उजागर करता है।
यदि समय रहते सांसद स्तर पर हस्तक्षेप नहीं होता, तो यह अवैध वसूली लंबे समय तक जारी रह सकती थी।

यह प्रकरण यह भी दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और मीडिया की भूमिका किस प्रकार आम जनता को राहत दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


निष्कर्ष

सांसद मनीष जायसवाल की सख्ती के बाद शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अवैध वसूली पर तत्काल रोक के संकेत मिले हैं। अधीक्षक कार्यालय का आदेश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसका वास्तविक असर तभी दिखेगा जब इसे जमीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू किया जाएगा।

सरकारी अस्पतालों का मूल उद्देश्य सेवा है, न कि शोषण। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इस आदेश को कितनी गंभीरता से लागू करता है और क्या दोषियों पर वास्तव में सख्त कार्रवाई होती है या नहीं।


रिपोर्ट — HF News 24 डेस्क.             Editor-in-Chief :  Pankaj Hindustani
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