PESA कानून पर झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख


सरकार से पूछा – आखिर कब लागू होगी नियमावली ?

अगली सुनवाई 17 दिसंबर

HF NEWS 24 | रांची
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में PESA Act लागू करने में हो रही लंबी देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्पष्ट और अंतिम समयसीमा देने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि सरकार सालों से सिर्फ आश्वासन देती आ रही है, जबकि अब तक कोई ठोस कदम नहीं दिखा। अदालत ने टिप्पणी की—

“अब वादा नहीं, परिणाम चाहिए। बताइए—पेसा नियमावली कब लागू होगी?”


खनन पर लगी रोक हटाने की अपील खारिज

सुनवाई के दौरान सरकार ने बालू और लघु खनिजों की नीलामी पर लगी रोक हटाने की मांग की,
लेकिन हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा—

“नियमावली के बिना संसाधनों का आवंटन स्वीकार्य नहीं।”

यानी जब तक पेसा नियमावली लागू नहीं होती, तब तक खनन कार्य की अनुमति नहीं


नियमावली पर क्या बोली सरकार

पंचायती राज विभाग ने बताया कि—

  • ड्राफ्ट तैयार हो चुका है
  • इसे कैबिनेट कोऑर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था
  • आपत्तियाँ आने के बाद ड्राफ्ट संशोधित किया गया
  • अब नियमावली कैबिनेट मंजूरी की प्रतीक्षा में

लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि
अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


पुराना आदेश अधूरा – अवमानना का दबाव

कोर्ट ने याद दिलाया कि 29 जुलाई 2024 को सरकार को
दो महीने के भीतर नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया गया था।
निर्धारित समय सीमा पार होने के बाद यह मामला अब
अवमानना (Contempt) की स्थिति में पहुँच चुका है।


पेसा क्यों जरूरी?

1996 में लागू PESA Act का उद्देश्य—

  • ग्रामसभा की सर्वोच्चता
  • जल–जंगल–जमीन पर समुदाय का अधिकार
  • जनजातीय स्वशासन

लेकिन 24 वर्ष बाद भी झारखंड में नियमावली लागू नहीं,
जिसे जनजातीय अधिकारों की अनदेखी माना जा रहा है।

यह मामला अदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।


HF NEWS 24 Concluding Line

हाईकोर्ट के सख्त रुख ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
अब सभी की निगाहें 17 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं,
जहाँ इस मुद्दे पर बड़ा फैसला संभव है।


  • हाईकोर्ट सख्त: सरकार बताए कब लागू होगा पेसा
  • खनन पर रोक जारी, नियमावली के बिना इजाज़त नहीं
  • 17 दिसंबर—निर्णायक दिन

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