हाई कोर्ट ने सख्त निगरानी का आदेश दिया
✍️ Pankaj Hindustani | Editor-in-Chief | HF NEWS 24
रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में कफ सिरप और अन्य नशीली/साइकोटिक दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को राज्य सरकार और स्टेट ड्रग कंट्रोलर को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना वैध मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के ऐसी दवाओं की बिक्री बिल्कुल प्रतिबंधित होनी चाहिए।
यह आदेश उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजधानी रांची में कफ सिरप और नशीली दवाओं का बड़े पैमाने पर गलत उपयोग स्कूली छात्रों द्वारा किया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
हाई कोर्ट ने क्यों दिया आदेश?
रांची निवासी सुनील कुमार महतो द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि कई मेडिकल स्टोर गैर-कानूनी तरीके से कफ सिरप और मन:प्रभावित (psychotropic) दवाएँ बिना डॉक्टर की पर्ची के बेच रहे हैं, जो नशे के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए सरकार को स्थिति पर तत्काल नियंत्रण करने का निर्देश दिया।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश

- कोई भी मेडिकल स्टोर बिना वैध मेडिकल पर्ची के कफ सिरप और साइकोटिक दवाएँ नहीं बेचेगा।
- स्टेट ड्रग कंट्रोलर को पूरे राज्य में दवा दुकानों और दवा कंपनियों के स्टॉक की नियमित जांच और छापेमारी करने का आदेश।
- नीतियों के अनुपालन की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।
- अगली सुनवाई 12 दिसंबर को निर्धारित।
याचिकाकर्ता की दलील
- राजधानी में कफ सिरप और नशीली दवाओं की बिक्री अनियंत्रित व गैर-कानूनी तरीके से हो रही है।
- बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और युवा वर्ग इन दवाओं का नशे के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
- इससे छात्रों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं।
समाज पर प्रभाव और चिंता
चिकित्सा विशेषज्ञ वर्षों से चेतावनी देते रहे हैं कि कोडिन-युक्त कफ सिरप और साइकोटिक दवाओं का अधिक उपयोग ब्रेन सिस्टम को प्रभावित करता है और नशे की लत में बदल सकता है।
कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार पर रोक लगाने और युवाओं को नशे से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
झारखंड हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य में कफ सिरप और मन:प्रभावित दवाओं पर नियंत्रण और कड़ी निगरानी के साथ बिक्री व्यवस्था बदलेगी। चिकित्सा जगत, अभिभावक और शिक्षण संस्थान इसे युवाओं को नशे के दुष्चक्र से बचाने वाली महत्वपूर्ण कार्रवाई मान रहे हैं।
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