झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब “नो पास, नो एंट्री”


कोर्ट परिसरों में लागू होगा डिजिटल Visitor Management System

RFID कार्ड और e-Pass से ही मिलेगा प्रवेश

रांची / जमशेदपुर

झारखंड में न्यायिक परिसरों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। Jharkhand High Court ने राज्य के प्रमुख न्यायालय परिसरों में Visitor Management System (VMS) लागू करने का निर्णय लिया है। अब बिना डिजिटल पास या RFID कार्ड के किसी को भी कोर्ट परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।

यह व्यवस्था “नो पास, नो एंट्री” नीति के तहत लागू की जा रही है, जिससे कोर्ट परिसर की सुरक्षा, निगरानी और भीड़ नियंत्रण को डिजिटल रूप दिया जा सके।


क्या है Visitor Management System (VMS)?

Visitor Management System (VMS) एक डिजिटल प्रवेश प्रणाली है, जिसके माध्यम से कोर्ट परिसर में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से दर्ज किया जाएगा।

वकील और न्यायिक कर्मियों के लिए

  • अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कोर्ट कर्मचारियों को RFID कार्ड जारी किए जाएंगे।
  • इन कार्डों को स्कैन कर प्रवेश और निकास दर्ज होगा।
  • हर गतिविधि का डेटा डिजिटल सर्वर में सुरक्षित रहेगा।

आम नागरिकों के लिए

  • कोर्ट आने वाले लोगों को पहले से ऑनलाइन पोर्टल पर e-Pass के लिए आवेदन करना होगा।
  • स्वीकृति मिलने के बाद डिजिटल पास जारी किया जाएगा।
  • मुख्य द्वार पर भी आवश्यक प्रक्रिया के बाद अस्थायी पास उपलब्ध होगा।

किन जिलों में पहले लागू होगा सिस्टम?

पहले चरण में यह व्यवस्था निम्न प्रमुख जिलों में लागू की जाएगी:

  • Ranchi
  • Jamshedpur
  • Hazaribagh
  • Dhanbad
  • Deoghar

सफल परीक्षण के बाद इसे राज्य के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।


सुरक्षा सख्त करने की जरूरत क्यों पड़ी?

कोर्ट परिसरों में पूर्व में हुई कुछ घटनाओं ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई थी।

  • 30 नवंबर 2016 को जमशेदपुर कोर्ट परिसर में गोलीबारी की घटना।
  • 28 जनवरी 2023 को कोर्ट परिसर में हथियार के साथ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी।

इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने की आवश्यकता महसूस की गई।


VMS से क्या होंगे फायदे?

1. भीड़ नियंत्रण

अनावश्यक भीड़ पर रोक लगेगी और प्रवेश सुव्यवस्थित होगा।

2. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर

हर व्यक्ति का डिजिटल रिकॉर्ड होने से सुरक्षा एजेंसियों को मदद मिलेगी।

3. पारदर्शिता और जवाबदेही

कौन, कब और किस उद्देश्य से कोर्ट परिसर में आया — इसका स्पष्ट रिकॉर्ड रहेगा।

4. आधुनिक डिजिटल न्यायिक व्यवस्था

यह कदम न्यायालयों को तकनीकी रूप से उन्नत और सुरक्षित बनाएगा।


न्यायिक सूत्रों की मानें तो…

यह व्यवस्था न्यायालय की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल निगरानी से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि कार्यप्रणाली भी अधिक व्यवस्थित होगी।


HF News 24 निष्कर्ष

झारखंड हाईकोर्ट का यह निर्णय राज्य की न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। “नो पास, नो एंट्री” नीति और डिजिटल Visitor Management System लागू होने से कोर्ट परिसरों में सुरक्षा का स्तर नई ऊँचाइयों तक पहुंचेगा।

तकनीक के सहारे न्यायालयों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की यह पहल आने वाले समय में पूरे राज्य के लिए मिसाल साबित हो सकती है।


https://chat.whatsapp.com/GPVSxk0fZqiBY2yKPTZsed?mode=ems_copy_t

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *