संघर्ष, त्याग और गौरव की गाथा को किया गया नमन


झारखंड राज्य स्थापना दिवस पर दारू प्रखंड में स्वतंत्रता सेनानियों का हुआ सम्मान

✍️ प्रबंध संपादक : आलोक राज | HF NEWS 24


दारू (हजारीबाग): 15 November 2025.
झारखंड राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर पर शनिवार को दारू प्रखंड कार्यालय परिसर में एक गरिमामयी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उन स्वतंत्रता सेनानियों और राज्य आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने झारखंड को अलग राज्य के रूप में स्थापित करने के संघर्ष में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


🏅 आंदोलनकारियों के संघर्ष को मिला सम्मान

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रखंड विकास पदाधिकारी हारून रशीद ने आंदोलनकारियों को सम्मान पत्र प्रदान कर उनके साहस, समर्पण और योगदान को नमन किया।
उन्होंने कहा —

“झारखंड राज्य का निर्माण केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह हमारे संघर्ष, त्याग और अदम्य साहस का परिणाम है। इन वीर आंदोलनकारियों की बदौलत ही आज झारखंड एक स्वाभिमानी राज्य के रूप में खड़ा है।”

हारून रशीद ने आगे कहा कि राज्य की अस्मिता, संस्कृति और परंपरा को संरक्षित रखना आज की पीढ़ी का कर्तव्य है। उन्होंने झारखंड की लोक संस्कृति, भाषा और गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


🌾 “संघर्ष की इस धरती को नमन”

इस मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और प्रखंड कर्मियों ने भी आंदोलनकारियों को सम्मानित करते हुए कहा कि दारू की धरती हमेशा से संघर्ष और सेवा की मिसाल रही है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा राज्य के अधिकार और सम्मान के लिए समर्पित किया — वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के प्रतीक हैं।


👥 गांव-गांव में गूंजा गौरव का जश्न

सम्मान समारोह में प्रखंड कर्मी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में झारखंड राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं और राज्य के गौरवशाली इतिहास को याद किया।
कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में “जय झारखंड” और “धरती आबा बिरसा मुंडा अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा।


दारू में पुनर्जीवित हुई झारखंड आंदोलन की गाथा

यह कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन था, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास की पुनः स्मृति भी थी जिसने झारखंड को उसकी अलग पहचान दिलाई।
दारू प्रखंड के लिए यह क्षण गर्व का था, जब स्थानीय आंदोलनकारियों के योगदान को पूरे सम्मान के साथ याद किया गया।


Editor-in-Chief : Pankaj Hindustani


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