✍️ Pankaj Hindustani | Editor-in-Chief | HF News 24 | 15 नवंबर 2025, झारखंड
आज 15 नवंबर है—वह ऐतिहासिक दिन जब झारखंड की धरती ने नया अस्तित्व पाया था।
वर्ष 2000 में बने इस राज्य ने 25 वर्षों की अपनी यात्रा में संघर्ष, सांस्कृतिक गौरव और विकास की कई कहानियाँ लिखीं।
यह दिन विशेष रूप से धरती आबा बिरसा मुंडा की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने झारखंड को पहचान देने के लिए अपने जीवन का हर क्षण समर्पित कर दिया।
झारखंड का जन्म: संघर्ष, त्याग और अस्मिता की अग्नि से बना एक राज्य
झारखंड कोई संयोग नहीं था।
यह उस आवाज़ का परिणाम था जो सदियों से पहाड़ों, जंगलों और जनजातीय आत्मा में गूंजती आई थी।
यह उन लोगों का राज्य है
जिन्होंने कहा था:
“अबुआ दिशुम, अबुआ राज — अपना देश, अपना राज।”
— बिरसा मुंडा
उनका यह संदेश आज भी झारखंड की आत्मा में धड़कता है।
बिरसा मुंडा: एक युवा जिसने इतिहास बदल दिया
केवल 25 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों की व्यवस्था को हिला देने वाला यह युवा आज भी झारखंड की प्रेरणा है।
उन्होंने अत्याचार, अन्याय और शोषण के खिलाफ जनक्रांति की ज्योत जलाई।
उन्होंने कहा था:
“मैं गुलामी में जन्मा जरूर हूँ,
लेकिन जीऊँगा अपनी धरती की आज़ादी के लिए।”
— बिरसा मुंडा
बिरसा मुंडा की यह ज्वाला आज भी झारखंड के हर युवा के भीतर जीवित है।
सिदो–कान्हू, फूलो–झानो और क्रांति का आंदोलन
बिरसा के साथ-साथ कई नायकों ने झारखंड की पहचान के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया।
सिदो और कान्हू मुर्मू
1855 के संताल विद्रोह के नायक, जिन्होंने कहा था:
“हम मिट जाएंगे,
पर अपनी मिट्टी नहीं बेचेंगे।”
फूलो और झानो
महिलाओं की वीरता का प्रतीक, जिन्होंने हथियार उठाकर अत्याचार को चुनौती दी।
जतरा टाना भगत
शांति, सत्य और आदिवासी संस्कृति के पुजारी, जिन्होंने कहा:
“धरती माँ है, उसका अपमान नहीं होने देंगे।”
इन महापुरुषों ने मिलकर वह नींव रखी, जिस पर आज का झारखंड खड़ा है।
संस्कृति और विरासत: झारखंड की असली पहचान
सरहुल, करमा, सोहराय, छऊ, टुसू, झूमर, फगुआ—
ये केवल त्योहार या नृत्य नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा हैं।
झारखंड में वन, पर्वत, नदियाँ और खनिज केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनशैली हैं।
आधुनिक झारखंड: विकास और चुनौतियों की साझा यात्रा
25 वर्षों में झारखंड ने शिक्षा, खेल, खनन, सड़क निर्माण, बिजली, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
लेकिन जल–जंगल–जमीन, बेरोजगारी और युवा अवसर जैसी चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं।
स्थापना दिवस हमें याद दिलाता है कि:
“झारखंड केवल एक राज्य नहीं,
एक विचार है, एक स्वाभिमान है,
एक चलती हुई विरासत है।”
स्थापना दिवस का संदेश
इस विशेष दिन पर
— उन शहीदों को नमन
— उन महापुरुषों को सलाम
— और उस मिट्टी को प्रणाम
जिसने हमें पहचान दी।
HF News 24 झारखंड की जनता को
स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता है।
जय झारखंड।
धरती आबा अमर रहें।
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