सातवें दिन भी आंदोलन तेज, सरकारी योजनाओं पर असर
HF News 24 | रांची / झारखंड | 28 नवम्बर 2025
झारखंड राज्य में Jharkhand State Livelihood Promotion Society (JSLPS) के लगभग 4,000 से अधिक कर्मचारी अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। यह आंदोलन 21 नवम्बर 2025 से शुरू हुआ था और आज सातवें दिन भी पूरे राज्य में जारी है।
कर्मचारी राज्यभर के जिला मुख्यालयों के सामने बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
कर्मियों की मुख्य माँगें
जेएसएलपीएस कर्मियों ने सरकार व विभाग के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- JSLPS कर्मियों को “राज्य कर्मी” का दर्जा दिया जाए।
- नई HR Policy / NMMU Policy को तत्काल लागू किया जाए।
- वेतनमान व भत्ते में सुधार, 10% वार्षिक वेतन वृद्धि तथा DA, बीमा व अन्य लाभ प्रदान किए जाएँ।
- अनुभव व योग्यता के आधार पर पदोन्नति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- गृह-जिले या नजदीकी प्रखंड में पदस्थापना का अधिकार दिया जाए।
- सेवा स्थायित्व (Job Security) एवं नियमित वेतन व्यवस्था की गारंटी।
कर्मचारियों का कहना है कि कई वर्षों के काम और संघर्ष के बाद भी उन्हें स्थायी दर्जा एवं उचित मानदेय नहीं मिला है, जिससे नौकरी और परिवार दोनों चलाना कठिन होता जा रहा है।
जिलों में आंदोलन की स्थिति
हड़ताल की व्यापकता पूरे राज्य में दिखाई दे रही है। विभिन्न जिलों से रिपोर्ट्स प्राप्त हुई हैं:
- रांची, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, गुमला, सिमडेगा, चतरा, देवघर, जामताड़ा, गढ़वा, लोहरदगा, जमशेदपुर, दुमका सहित लगभग सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन जारी है।
- कई जिलों के समाहरणालय / जिला मुख्यालय के सामने हजारों कर्मी रोज़ बैठ रहे हैं और सरकार व विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर आंदोलन ने राज्यव्यापी रूप ले लिया है।
हड़ताल का प्रभाव — ग्रामीण योजनाएँ ठप
जेएसएलपीएस ग्रामीण विकास, आजीविका मिशन, महिला स्वयं सहायता समूह, बैंक-लिंक्ड लोन, आजीविका दीदी कार्यक्रम, गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण उद्यमिता और सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़ा हुआ है।
हड़ताल के कारण:
- SHG समूहों की बैठकें बंद
- लोन व बैंकिंग कार्य प्रभावित
- आजीविका प्रशिक्षण प्रोग्राम ठप
- महिला सशक्तिकरण योजनाओं में बाधा
- गरीब परिवारों को मिलने वाले लाभ में देरी
ग्रामीण जनता और महिलाओं को सीधा असर झेलना पड़ रहा है।
कर्मचारी क्या कह रहे हैं
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“हम वर्षों से काम कर रहे हैं और योजनाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन हमारे अधिकारों पर ध्यान नहीं दिया गया। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम वापस काम पर नहीं लौटेंगे।”
सरकार व JSLPS प्रबंधन पर दबाव
हड़ताल लगातार बढ़ने के साथ अब सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं आया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।
सरकार की ओर से अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। बातचीत की अपील भी अब तक नहीं की गई है।
निष्कर्ष
JSLPS कर्मियों की यह हड़ताल विकास योजनाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार कर्मचारियों की मांगों पर कब तक ठोस कदम उठाती है।
✍️ Pankaj Hindustani | Editor-in-Chief | HF News 24
रिपोर्ट: HF News 24 डेस्क
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