दारू प्रखंड के झुमरा बाजार में ‘पिंक शौचालय’ बना शोपीस


महिलाओं की सुविधा की जगह बन गया प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक

HF News 24 | दारू (हजारीबाग)

सरकारें भले ही महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान और सुरक्षित सार्वजनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती हों, लेकिन झारखंड के दारू प्रखंड अंतर्गत झुमरा बाजार की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहाँ लाखों रुपये की लागत से बनाया गया ‘पिंक शौचालय’ महीनों से बनकर तैयार है, लेकिन दुर्भाग्य यह कि आज तक उस पर ताला लटका हुआ है

जो शौचालय महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाया गया था, वही आज महिलाओं की मजबूरी और शर्मिंदगी का कारण बन गया है।


सैकड़ों महिलाएँ हर हफ्ते झुमरा बाजार आती हैं

झुमरा साप्ताहिक बाजार दारू प्रखंड का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। यहाँ हर सप्ताह सैकड़ों महिलाएँ—

  • सब्जी बेचने
  • अनाज, कपड़ा, घरेलू सामान खरीदने
  • पशुपालन व दैनिक जरूरतों के लिए
    दूर-दराज़ के गाँवों से आती हैं।

लेकिन बाजार में महिलाओं के लिए एक भी चालू सार्वजनिक शौचालय नहीं है। इस कारण महिलाएँ घंटों अपनी जरूरतें दबाकर बैठी रहती हैं या फिर मजबूरी में खुले स्थानों की तलाश करती हैं।


‘पिंक शौचालय’ बना था उम्मीद की किरण

महिला सुविधा को ध्यान में रखते हुए झुमरा बाजार में ‘पिंक शौचालय’ का निर्माण कराया गया था।
इसका उद्देश्य था—

  • महिलाओं को सुरक्षित शौच सुविधा देना
  • स्वच्छता बढ़ाना
  • महिलाओं की गरिमा बनाए रखना

शौचालय बनकर तैयार भी हो गया। लेकिन…
दरवाजे पर आज भी ताला लटका हुआ है।


ताला लगा है, परेशानियाँ खुली हुई हैं

स्थानीय महिलाओं का कहना है कि उन्होंने कई बार इस शौचालय को खुलवाने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

एक महिला विक्रेता ने कहा—

“सरकार ने हमारे लिए शौचालय तो बना दिया, लेकिन हमें उसका इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं दिया। क्या हम इंसान नहीं हैं?”

दूसरी महिला ने कहा—

“दिन भर बाजार में बैठना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर खुले में जाना पड़ता है, जो बहुत शर्मनाक और डरावना होता है।”


सवालों के घेरे में प्रशासन

सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

जब शौचालय का इस्तेमाल ही नहीं कराना था, तो इसे बनाया क्यों गया?

क्या यह केवल सरकारी फाइलों में योजना पूरी करने और बजट खर्च करने का जरिया बन गया?
अगर निर्माण हुआ है तो संचालन क्यों नहीं?

स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि—

“सरकारी योजनाएँ कागजों पर तो पूरी होती हैं, लेकिन जमीन पर सिर्फ ताले और लापरवाही दिखती है।”


स्वच्छता और महिला सुरक्षा पर सीधा प्रहार

बंद शौचालय के कारण महिलाएँ—

  • खुले में शौच को मजबूर हैं
  • असुरक्षित स्थानों पर जाती हैं
  • शर्म और डर के बीच अपनी जरूरत पूरी करती हैं

यह न सिर्फ स्वच्छता मिशन का अपमान है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर भी सीधा हमला है।


जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मुद्दे पर

  • पंचायत प्रतिनिधि
  • प्रखंड प्रशासन
  • जिला प्रशासन

सब चुप हैं।

“नेता चुनाव के समय वोट माँगने आते हैं, लेकिन महिलाओं की जरूरत पर कोई नहीं दिखता,”
एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा।


HF News 24 की पड़ताल

HF News 24 की टीम ने जब मौके पर जाकर देखा तो पाया कि—

  • शौचालय पूरी तरह तैयार है
  • पानी की व्यवस्था भी की गई है
  • लेकिन ताले में जंग लगने लगी है

यह दृश्य बताता है कि यह महीनों से बंद पड़ा है


सरकार की योजनाएँ ज़मीन पर क्यों फेल हो रही हैं?

पिंक टॉयलेट योजना का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान और सुविधा देना था।
लेकिन झुमरा बाजार में यह योजना
भ्रष्ट व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ गई।


अब क्या चाहिए?

स्थानीय महिलाओं और सामाजिक संगठनों की मांग है—

  • शौचालय का ताला तुरंत खोला जाए
  • नियमित सफाई और देखरेख की व्यवस्था हो
  • महिला केयरटेकर नियुक्त की जाए
  • दोषी अधिकारियों से जवाब लिया जाए

HF News 24 निष्कर्ष

झुमरा बाजार का यह ‘पिंक शौचालय’ आज

महिला सशक्तिकरण का प्रतीक नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का पोस्टर बन चुका है।

अगर प्रशासन जल्द नहीं जागा, तो यह मामला केवल स्वच्छता का नहीं, बल्कि महिला अधिकारों का बड़ा सवाल बन जाएगा।


रिपोर्ट — HF News 24 डेस्क
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