✍️ Pankaj Hindustani |Editor-in-Chief | HF News 24 | दारू (हजारीबाग)
दारू प्रखंड क्षेत्र में आज ठाकुर समुदाय के लोगों द्वारा बिहार के जननायक, सामाजिक न्याय के प्रबल प्रहरी स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर जी (1924–1988) की जयंती श्रद्धा, सम्मान और विचार-चिंतन के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र में सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के मूल्यों को याद किया गया तथा उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने कर्पूरी ठाकुर जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके संघर्षपूर्ण जीवन, ईमानदार राजनीति और समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए योगदान को स्मरण किया।
सादगी, ईमानदारी और सामाजिक न्याय की मिसाल
कर्पूरी ठाकुर जी का जीवन सादगी, ईमानदारी और निष्ठा का प्रतीक रहा। उन्होंने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक परिवर्तन का साधन बनाया।
उन्होंने दो बार बिहार के मुख्यमंत्री और एक बार उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए गरीब, पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों की मजबूती से पैरवी की।
सामाजिक न्याय, पिछड़ा वर्ग आरक्षण, शिक्षा और समान अवसर के क्षेत्र में उनके फैसले आज भी भारतीय राजनीति में मील का पत्थर माने जाते हैं।
कर्पूरी ठाकुर: विचार जो आज भी जीवित हैं
समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गाँव (अब कर्पूरी ग्राम) में जन्मे कर्पूरी ठाकुर जी ने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनका मानना था कि—
“सत्ता का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुँचाना है।”
उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई लड़ने वालों के लिए पथ-प्रदर्शक बने हुए हैं।
भारत रत्न से सम्मान — पूरे देश के लिए गौरव
कर्पूरी ठाकुर जी को उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत भारत रत्न (2024) से सम्मानित किया जाना पूरे देश, विशेषकर सामाजिक न्याय की विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए गर्व का विषय है।
इस सम्मान को लोगों ने उनके संघर्ष, सिद्धांतों और जीवनभर की निस्वार्थ सेवा की उचित पहचान बताया।
दारू प्रखंड में विचार गोष्ठी और संकल्प
जयंती के अवसर पर दारू प्रखंड में आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जी केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचार और आंदोलन थे।
लोगों ने उनके पदचिह्नों पर चलने, सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने और समानता आधारित समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
स्थानीय लोगों का कहना था कि आज के दौर में कर्पूरी ठाकुर जी के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।

HF News 24 निष्कर्ष
दारू प्रखंड में कर्पूरी ठाकुर जी की जयंती केवल एक स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और सादगीपूर्ण राजनीति के मूल्यों को दोहराने का अवसर बनी।
उनका जीवन और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
रिपोर्ट: HF News 24 डेस्क
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