मांडू विधायक ने उठाई आवाज
हजारीबाग/कोनार | HF NEWS 24
कोनार डैम परिसर में डीवीसी (Damodar Valley Corporation) की ओर से प्रस्तावित 8 मेगावाट क्षमता वाले सोलर ऊर्जा संयंत्र का शिलान्यास रविवार को होना तय है। कार्यक्रम में डीवीसी के चेयरमैन एस. सुरेश कुमार एवं उनकी धर्मपत्नी एस.वी. जलदुर्गा मुख्य अतिथि के रूप में शिलान्यास करेंगे।
लेकिन कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले ही शनिवार को विस्थापितों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और परियोजना कार्यालय के सामने धरना दिया।
“विस्थापितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं” — मांडू विधायक
धरना-प्रदर्शन में मांडू विधायक निर्मल महतो उर्फ़ तिवारी महतो स्वयं पहुँचे और डीवीसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा—
“कोनार परियोजना के विस्थापितों को उनके हक और अधिकार दिए बिना किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। डीवीसी की मनमानी नहीं चलेगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्थापितों को
- पुनर्वास,
- नियोजन (रोजगार)
- मुआवजा,
- मूलभूत सुविधाएँ
प्रदान किए बिना सोलर प्लांट कार्य आगे नहीं बढ़ सकता।
जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज किए जाने पर नाराजगी
विधायक तिवारी महतो ने शिलान्यास कार्यक्रम में स्थानीय सांसदों, विधायकों और पंचायत प्रतिनिधियों को आमंत्रण न दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा—
“किसी सरकारी कार्यक्रम से जनप्रतिनिधियों को दूर रखना अस्वीकार्य है। यह कार्यक्रम यदि गुप्त तरीके से किया गया तो इसका बहिष्कार होगा।”
उन्होंने कोनार परियोजना के प्रभारी राणा रंजीत सिंह को फटकार लगाते हुए शिलान्यास कार्यक्रम तत्काल स्थगित करने की मांग भी रखी।
“कानून से ऊपर कोई नहीं” — समर्थन में कई नेता
धरना स्थल पर
- झारखंड आंदोलनकारी व अधिवक्ता चंद्रनाथ भाई पटेल,
- मध्य जिप सदस्य शेख तैयब,
- सामाजिक कार्यकर्ता छोटेलाल बेसरा
सहित कई वक्ताओं ने संबोधन किया और विस्थापितों की मांगों को पूरी तरह न्यायसंगत बताया। उन्होंने कहा—
“जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए बिना सोलर परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती। विरोध जारी रहेगा।”
स्थानीय लोगों ने भी मंच से विस्थापित परिवारों के हित में आवाज बुलंद की।

परियोजना का महत्व
डीवीसी का यह 8 मेगावाट सोलर प्लांट क्षेत्र में
- हरित ऊर्जा उत्पादन,
- बिजली क्षमता वृद्धि,
- स्थानीय विकास
के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे के चलते यह परियोजना विवाद के केंद्र में आ गई है।
आगे क्या?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि
- शिलान्यास कार्यक्रम पर अनिश्चितता बढ़ गई है,
- और बातचीत के बिना परियोजना को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है।
स्थानीय लोग अब सरकारी हस्तक्षेप और समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
✍️ Pankaj Hindustani : Editor-in-Chief | HF News 24
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