लातेहार में 14 वर्षीय आदिवासी लड़की से दुष्कर्म का आरोप


पड़ोसी युवक फरार, मामला POCSO अधिनियम के तहत दर्ज

HF NEWS 24 | लातेहार (झारखंड)।

झारखंड के लातेहार जिले में एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ दुष्कर्म का शर्मनाक मामला सामने आया है। यह घटना बुधवार को चांदवा थाना क्षेत्र के लधूप पंचायत में हुई। मामला तब उजागर हुआ जब पीड़िता ने परिजनों के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।


कैसे हुई घटना?

प्राप्त शिकायत के मुताबिक—

  • आरोपी युवक पीड़िता का पड़ोसी है।
  • उसने लड़की को बहलाकर एक सुनसान स्थान पर ले गया।
  • वहीं पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।


पुलिस का बयान

चांदवा थाना प्रभारी रंधीर कुमार ने बताया कि—

  • मामले में POCSO अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
  • पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है।

लातेहार के पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने पुष्टि की कि—

  • आरोपी वयस्क है, जिसकी उम्र लगभग 18 से 20 वर्ष के बीच है।
  • वह फिलहाल फरार है और उसे पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।

पीड़िता की हालत

प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार—

  • लड़की के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं।
  • हालांकि, मामले के मानसिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को गंभीर माना जा रहा है।

मेडिकल रिपोर्ट के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।


कानूनी कार्रवाई

इस मामले में—

  • पोक्सो एक्ट के तहत कठोर धाराएँ लागू की गई हैं।
  • आरोपी की गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में पेशी और आगे की कानूनी सुनवाई होगी।
  • पुलिस घटना स्थल और साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी कर रही है।

सामाजिक पहलू

यह मामला कई वजहों से संवेदनशील है—

  • पीड़िता नाबालिग है।
  • वह आदिवासी समुदाय से संबंधित है, जो पहले से ही सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग में आता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में—

  • पीड़िता को मानसिक परामर्श (काउंसलिंग),
  • सामाजिक सुरक्षा,
  • और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना बेहद ज़रूरी है।

अगले चरण

पुलिस अब—

  • मोबाइल लोकेशन,
  • स्थानीय इनपुट,
  • और संदिग्ध संपर्कों के आधार पर
    आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

निष्कर्ष

लातेहार की यह घटना:

  • बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है,
  • और यह स्पष्ट करती है कि नाबालिगों की सुरक्षा के लिए
    क़ानूनी कार्रवाई के साथ-साथ समुदाय और प्रशासन की सतर्कता अनिवार्य है।

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