झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 72 घंटे में खाली कराने का निर्देश
HF News 24 | रांची
राजधानी रांची स्थित राज्य के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान RIMS (Rajendra Institute of Medical Sciences) की लगभग 10 एकड़ जमीन पर फैले अवैध अतिक्रमण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रशासन को 72 घंटे के भीतर सभी अवैध कब्जाधारियों को हटाने का आदेश दिया है। आदेश के बाद RIMS प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में तत्काल सक्रियता बढ़ गई है।
यह जमीन मोरहाबादी मौजा की 8 एकड़ और कोकर मौजा की 1.65 एकड़ क्षेत्र में स्थित है, जिस पर लंबे समय से दुकानों, कच्चे-पक्के मकानों, धार्मिक संरचनाओं और बाजारों का अवैध निर्माण चल रहा था। अदालत का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था की भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
कैसे हुआ मामला अदालत तक ?
Jharkhand State Legal Services Authority (झालसा) की ओर से RIMS परिसर का निरीक्षण किया गया और रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। निरीक्षण में पाया गया कि:
- बाउंड्री दीवार को तोड़कर अंदर रास्ते बना लिए गए थे
- 150 से अधिक कच्चे व पक्के मकान, दुकानें और धार्मिक संरचनाएँ बनाई गई थीं
- अव्यवस्थित भीड़ और अवैध बाज़ार से अस्पताल के मरीजों, डॉक्टरों और स्टाफ की सुरक्षा खतरे में थी
- संवेदनशील स्वास्थ्य संस्थान का वातावरण बाज़ार में बदल चुका था
रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल कार्यवाही का आदेश दिया।

हाई कोर्ट का आदेश — 72 घंटे की अल्टीमेटम
अदालत ने कहा:
“सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था की जमीन पर कोई भी अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 72 घंटे में जमीन को कब्जा-मुक्त किया जाए, अन्यथा बलपूर्वक निष्कासन किया जाएगा।”
साथ ही, कोर्ट ने:
- SSP रांची को पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए
- अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी जारी की
- RIMS प्रशासन व जिला उपायुक्त को कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा
अतिक्रमणकारियों में हड़कंप, नोटिस वितरण शुरू
अदालत के आदेश के बाद RIMS परिसर के आसपास तनावपूर्ण माहौल है।
प्रशासन ने:
- लगभग 150 से अधिक कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया
- सभी अवैध निर्माणों पर सीलिंग नोटिस और चेतावनी पोस्टर चिपकाए
- भारी पुलिस बल तैनात किया
कुछ लोगों ने वर्षों से निवास और दुकान चलाने का हवाला देते हुए आपत्ति जताई, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन किसी भी स्थिति में अनिवार्य है।
क्यों है यह मुद्दा महत्वपूर्ण ? — स्वास्थ्य प्रणाली पर असर
प्रभावित क्षेत्र समस्या मरीजों की आवाजाही भीड़ और व्यापारिक गतिविधियों से बाधा चिकित्सकीय आपातकाल एम्बुलेंस मूवमेंट प्रभावित सुरक्षा बाहरी गतिविधियों का बढ़ा खतरा अस्पताल परिसर अनुशासनहीन और अव्यवस्थित वातावरण सार्वजनिक संसाधन सरकारी जमीन का दुरुपयोग
विशेषज्ञों के अनुसार यदि नियंत्रित न किया गया, तो यह स्थिति अस्पताल संचालन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती थी।
आगे क्या? — संभावित कार्रवाई
- कब्जाधारियों द्वारा स्वयं हटाए जाने पर प्रक्रिया सहज होगी
- न हटने पर जबरन तोड़फोड़ एवं बलपूर्वक निष्कासन
- परिसर की बाउंड्री वॉल पुनर्निर्माण और सुरक्षा मजबूत करने की संभावना
- अस्पताल विस्तार परियोजनाओं का मार्ग साफ होगा
HF News 24 की रिपोर्ट — न्याय और प्रशासन के लिए मजबूत संदेश
RIMS भूमि अतिक्रमण प्रकरण केवल जमीन खाली कराने का मुद्दा नहीं, बल्कि नीति, कानून, प्रशासन और सार्वजनिक हित से जुड़ा हुआ है।
हाईकोर्ट का आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि:
“अवैध कब्जा चाहे कितना पुराना क्यों न हो, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
यह कदम झारखंड में अन्य अवैध कब्जों पर भी कड़ा प्रभाव डाल सकता है।
निष्कर्ष
RIMS जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान की जमीन की सुरक्षा — राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक क्षमता और न्यायिक दृढ़ता की परीक्षा है।
72 घंटे की समय-सीमा पूरी होने के बाद अगले चरण की कार्रवाई पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी।
HF News 24 इस मामले में आगे की कार्रवाई और विकास पर निरंतर अपडेट देता रहेगा।
✍ रिपोर्ट — HF News 24 डेस्क
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