हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
HF News 24 | रांची (झारखंड)
रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) परिसर में अवैध अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद RIMS परिसर में बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के साथ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई के दौरान जहाँ एक ओर प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोग, विशेषकर महिलाएँ और परिवार, विरोध प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं।
इस पूरे अभियान से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे मामला राज्यभर में चर्चा का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई में आई तेजी
जानकारी के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट ने RIMS परिसर में वर्षों से चले आ रहे अवैध निर्माण और कब्जों को हटाने का स्पष्ट आदेश दिया था। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि तय समय-सीमा के भीतर सभी अवैध कब्जे हटाए जाएँ।
इसी आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन, पुलिस बल और RIMS प्रबंधन की संयुक्त टीम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया है।
प्रशासन का कहना है कि RIMS की जमीन पूरी तरह सरकारी है और उस पर किसी भी प्रकार का निजी कब्जा या निर्माण कानूनन अवैध है।
बुलडोजर से झोपड़ियों से लेकर पक्के भवन तक ध्वस्त
अभियान के दौरान RIMS परिसर और उसके आसपास बने—
- झोपड़ियाँ
- अस्थायी मड़ई
- दुकाननुमा संरचनाएँ
- पक्के मकान
- बहुमंजिला इमारतें
को चिन्हित कर बुलडोजर से गिराया जा रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अब तक दर्जनों अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं और आगे भी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
DIG ग्राउंड और डॉक्टर्स कॉलोनी के आसपास बने चार मंजिला पक्के भवनों को भी चिन्हित किया गया है, जिन पर विशेष तकनीकी निगरानी में कार्रवाई की जा रही है ताकि आसपास की संरचनाओं को नुकसान न पहुँचे।
महिलाओं और स्थानीय लोगों का विरोध
जैसे ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई, स्थानीय लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया।
विशेष रूप से महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि वे वर्षों से यहाँ रह रही हैं और अचानक हुई कार्रवाई से उनका सब कुछ उजड़ गया।
विरोध के दौरान कुछ जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस बल को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ RIMS बुलडोजर एक्शन
सोशल मीडिया पर #RIMS, #BulldozerAction, #AntiEncroachmentDrive जैसे हैशटैग्स ट्रेंड कर रहे हैं।
कुछ यूजर्स प्रशासन की कार्रवाई को सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ
इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।
कुछ नेताओं और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया है कि—
- वर्षों से अवैध निर्माण कैसे होते रहे?
- नक्शा पास और रजिस्ट्री किस आधार पर हुई?
- बड़े निर्माणों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
वहीं प्रशासन का कहना है कि यह मामला अब न्यायालय के आदेश से जुड़ा है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई संभव नहीं है।
प्रशासन का स्पष्ट रुख
प्रशासन और RIMS प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि—
✔ यह कार्रवाई पूरी तरह हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है
✔ अतिक्रमणकारियों को पहले नोटिस और समय दिया गया था
✔ सरकारी और सार्वजनिक जमीन को मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है
✔ अभियान आगे भी जारी रहेगा
प्रशासन का कहना है कि RIMS एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है और उसकी जमीन का उपयोग केवल स्वास्थ्य सेवाओं और जनहित के लिए ही किया जाएगा।
HF News 24 विश्लेषण
RIMS परिसर में चल रहा बुलडोजर अभियान केवल एक अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई नहीं, बल्कि यह कानून बनाम मानवीय संकट की जटिल तस्वीर पेश करता है।
जहाँ एक ओर सरकारी भूमि और न्यायालय के आदेश का पालन अनिवार्य है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और मानवीय पक्ष भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो यह दिखाते हैं कि यह मुद्दा केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि राज्यस्तरीय बहस का रूप ले चुका है।
निष्कर्ष
RIMS परिसर में अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान फिलहाल जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि—
- प्रशासन पुनर्वास को लेकर क्या कदम उठाता है
- न्यायालय में आगे क्या निर्णय आता है
- और क्या यह कार्रवाई भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए मिसाल बन पाती है या नहीं
फिलहाल RIMS बुलडोजर एक्शन झारखंड की सबसे बड़ी और संवेदनशील प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक बन चुका है।
रिपोर्ट — HF News 24 डेस्क
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