12 दिसंबर को रांची में महाधरना: सरना समिति ने दी चेतावनी
✍️ Pankaj Hindustani | Editor-in-Chief | HF News 24
रांची : झारखंड में आदिवासी पहचान और आरक्षण को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा होने जा रहा है। केंद्रीय सरना समिति ने घोषणा की है कि 12 दिसंबर को राजभवन/लोकभवन के समक्ष विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा। इस धरने में समिति धर्मान्तरित—विशेषकर ईसाई आदिवासियों—को ST सूची से डीलिस्टिंग (हटाने) की मांग जोरदार तरीके से उठाएगी।
समिति का कहना है कि धर्मान्तरित आदिवासी दोहरा लाभ ले रहे हैं, जिससे मूल सरना आदिवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
समिति ने साफ कहा है कि—
“जो व्यक्ति सरना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाता है, उसे आदिवासी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह सामाजिक न्याय के खिलाफ है।”
सरना नेताओं ने बताया कि इस मुद्दे पर राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और 12 दिसंबर का धरना ऐतिहासिक होगा।
सरना समिति का तर्क — ‘धर्म बदलने से समुदाय बदलता है’
समिति का कहना है कि ST दर्जा किसी धर्म पर आधारित नहीं है, लेकिन आदिवासी पहचान धर्म, संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाजों से जुड़ी है।
सरना पूजा, प्रकृति उपासना, और सामाजिक ढांचे को छोड़ देने के बाद भी ST दर्जा बरकरार रखना अन्यायपूर्ण बताया गया है।
केंद्रीय सरना समिति के नेताओं ने यह भी कहा कि—
- कई धर्मान्तरित समुदायों को अल्पसंख्यक लाभ + ST लाभ, दोनों मिल रहे हैं।
- इससे “मूल आदिवासियों” की हिस्सेदारी कम हो रही है।
- सरकार को जल्द कदम उठाकर डीलिस्टिंग प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
समिति नेताओं ने दावा किया कि इस आंदोलन को झारखंड, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बंगाल के आदिवासी संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।
12 दिसंबर का महाधरना — हजारों लोग जुटेंगे
केंद्रीय सरना समिति ने कहा कि 12 दिसंबर का महाधरना शांतिपूर्ण लेकिन ऐतिहासिक होगा।
धरने का उद्देश्य—
- सरकार को डीलिस्टिंग पर निर्णय लेने का आग्रह
- आदिवासी समाज में समान अधिकार की मांग
- सरना धर्म की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा
- “दोहरा लाभ” रोकने के लिए नीति निर्माण
समिति ने सभी जिलों से आदिवासियों से शामिल होने की अपील की है।
संवैधानिक पक्ष — बहस जारी
कई विशेषज्ञों के अनुसार, संविधान की धारा 342 में ST दर्जा धर्म से परे है।
इसके चलते डीलिस्टिंग की मांग कानूनी और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर गंभीर बहस को जन्म दे रही है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि—
- धर्म परिवर्तन से अधिकार नहीं बदलने चाहिए
- यह कदम समाज में विभाजन बढ़ा सकता है
जबकि सरना समूह इसे आदिवासी अस्तित्व और सांस्कृतिक अधिकारों का मुद्दा बताते हैं।
HF News 24 निष्कर्ष
12 दिसंबर का महाधरना झारखंड में एक बड़ी राजनीतिक-सामाजिक हलचल पैदा कर सकता है।
डीलिस्टिंग का मुद्दा पहले भी उठता रहा है, लेकिन इस बार आंदोलन का पैमाना बड़ा है और सरना समिति पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर रही है।
HF News 24 इस मामले पर लगातार नज़र बनाए हुए है और आपको हर अपडेट सबसे पहले उपलब्ध कराएगा। https://chat.whatsapp.com/GPVSxk0fZqiBY2yKPTZsed?mode=ems_copy_t






