झारखंड का चमकता सितारा: आदर्श ग्राम जरवा के सौरव शशि बने उप समाहर्ता (डिप्टी कलेक्टर)


किसान परिवार से उठकर प्रशासनिक सेवा तक पहुँचने की अद्भुत प्रेरणादायक कहानी

HF News 24 | विशेष रिपोर्ट | हजारीबाग / चुरचू

हजारीबाग जिले के आदर्श ग्राम जरवा, चुरचू प्रखंड के होनहार युवा सौरव शशि ने 11th–13th संयुक्त JPSC परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए झारखंड प्रशासनिक सेवा के प्रतिष्ठित पद

🏛️ उप समाहर्ता (Deputy Collector)

के पद पर चयन प्राप्त किया है।
यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और गाँव के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे राज्य के युवा छात्रों के लिए सपनों को साकार करने की जीवंत मिसाल बन गई है।


किसान परिवार से निकला प्रशासनिक सेवा का अधिकारी

परिवार विवरण माता कुंती देवी — आंगनवाड़ी सहायिका पिता जागो साव — किसान गाँव आदर्श ग्राम जरवा, चुरचू (हजारीबाग)

साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि और सीमित संसाधनों के बावजूद, सौरव ने साबित किया कि सपनों को उड़ान देने के लिए हिम्मत और मेहनत सबसे बड़ा धन है

कार्यक्रम स्थल पर ली गई तस्वीरों में उनके माता-पिता को बेटे के साथ गर्व से खड़े देखा जा सकता है—
उनके चेहरे की चमक, भीगी आँखें और मुस्कान बता रही थीं कि

यह जीत सिर्फ पद की नहीं, संघर्ष की जीत है।

अपने माता-पिता के साथ सौरव शशि

असफलता से जीत तक — 7th JPSC में 1 अंक से छूटा था चयन

सौरव का सफर आसान नहीं था।
7th JPSC में वे मात्र 1 अंक से चयनित नहीं हो पाए
यह उनके जीवन का सबसे कठिन क्षण था, लेकिन उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

“एक अंक से असफल होना दर्दनाक था, लेकिन उसी ने मुझे मजबूत बनाया। मैंने तय कर लिया था कि अगली बार अपनी जगह निश्चित करके लौटूंगा।”
— सौरव शशि

परिणाम सामने है —

दूसरे प्रयास में उप-समाहर्ता के रूप में सफलता।


शिक्षा और तैयारी

शिक्षा स्तर संस्थान 10वीं आदर्श उच्च विद्यालय, कारुखाप 12वीं + Graduation सेंट कोलंबस कॉलेज, हजारीबाग Post Graduation (PG) VBU, हजारीबाग JPSC तैयारीGuru IAS, Hazaribagh

छोटे गाँव की मिट्टी में पले इस युवा ने अपने संकल्प, अनुशासन और परिश्रम से यह सिद्ध किया कि

सफलता साधनों से नहीं, संकल्प से मिलती है।


गौरव का क्षण — मोरहाबादी मैदान में प्राप्त हुआ नियुक्ति-पत्र

राज्य सरकार द्वारा आयोजित नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह में सौरव ने यह गौरवपूर्ण दस्तावेज़ ग्रहण किया।
समारोह स्थल की तस्वीरों में देखा जा सकता है—

  • हाथ में चमकता नियुक्ति-पत्र,
  • चेहरे पर शांत, संयमित, पर गर्व से दमकती मुस्कान,
  • और चारों ओर तालियों व सम्मान का वातावरण।

उनके माता-पिता ने गले लगाकर आशीर्वाद दिया —
माँ की आंखों में आँसू और पिता की आँखों में चमक इस सफलता के वास्तविक मूल्य को बयां कर रही थी।

ग्रामीणों और परिचितों ने कहा—

“यह सफलता सौरव की नहीं — पूरे गाँव की जीत है।”

नियुक्ति पत्र प्राप्त करते हुए

युवाओं के लिए सौरव का संदेश

“सपना बड़ा रखिए। संघर्ष का रास्ता कठिन होगा, पर मेहनत, धैर्य और विश्वास के साथ कुछ भी असंभव नहीं। असफलता अंत नहीं — सफलता की तैयारी है।”


गाँव में जश्न का माहौल

  • पूरे गाँव में मिठाइयाँ बाँटी गईं
  • ढोल-नगाड़ों की धुन पर जश्न
  • छात्र-युवा प्रेरित, महिलाएँ गर्व से भावुक
  • ईश्वर और पूर्वजों के प्रति धन्यवाद प्रार्थनाएँ

गाँव के बुज़ुर्ग बोले—

“हमने कभी सोचा नहीं था कि हमारे गाँव का बेटा कभी डिप्टी कलेक्टर बनेगा। यह इतिहास है।”


सौरव शशि — आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा

  • किसान परिवार का बेटा — प्रशासनिक अधिकारी
  • संघर्ष को ताकत में बदलने की अद्भुत क्षमता
  • संसाधन नहीं, संकल्प की शक्ति सबसे बड़ी
  • झारखंड के युवाओं के लिए जीवंत प्रेरणा

निष्कर्ष

जहां हिम्मत हो — वहां मंज़िलें झुककर रास्ता देती हैं।

सौरव शशि की कहानी यह सिखाती है कि

“मेहनत, समर्पण और सपने — जीवन बदल सकते हैं।”

हजारीबाग और झारखंड आज गर्व से कह सकता है —
हमने एक संवेदनशील, निष्ठावान और जनसेवा के लिए समर्पित अधिकारी पाया है।


✍️ Pankaj Hindustani  | Editor-in-Chief : HF News 24
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