नन्हे कदम, बड़े सपने: श्री नारायणन एकेडमी में एडमिशन टेस्ट देते दिखे बच्चे, अभिभावकों की आंखों में उम्मीद


✍️ Pankaj Hindustani | Editor-in-Chief | HF News 24 | दारू (हजारीबाग)

दारू प्रखंड के सुल्तानी, बड़वार स्थित श्री नारायणन एकेडमी में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए चल रही एडमिशन प्रक्रिया अब एक अहम चरण में प्रवेश कर चुकी है। विद्यालय में एडमिशन टेस्ट की शुरुआत के साथ ही परिसर में बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों की सक्रियता देखने को मिली।
टेस्ट देते हुए बच्चों का दृश्य न केवल शिक्षा की प्रक्रिया को दर्शाता है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में बदलती शैक्षणिक सोच और बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक बन गया है।


टेबल पर कॉपियां, हाथों में पेंसिल और आंखों में भविष्य

विद्यालय परिसर के एक कक्ष में छोटे–छोटे बच्चे टेबल पर बैठकर अपनी कॉपियों में जवाब लिखते दिखाई दिए। किसी बच्चे का ध्यान प्रश्न पत्र पर था, तो कोई अपने माता-पिता की ओर भरोसे भरी निगाहों से देख रहा था।
बच्चों के मासूम चेहरे, ऊनी टोपी और सर्द मौसम के बीच शिक्षा के प्रति उनकी एकाग्रता ने हर देखने वाले को भावुक कर दिया।

यह दृश्य साफ संदेश दे रहा था—

“ये सिर्फ टेस्ट नहीं, बल्कि भविष्य की पहली सीढ़ी है।”


एडमिशन टेस्ट: डर नहीं, सही मूल्यांकन

विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह एडमिशन टेस्ट किसी प्रकार का दबाव या प्रतियोगी परीक्षा नहीं है, बल्कि बच्चों की आयु, समझ और बुनियादी ज्ञान को परखने की एक सहज प्रक्रिया है।

  • नर्सरी और केजी कक्षाओं के लिए सरल गतिविधि आधारित मूल्यांकन
  • बड़ी कक्षाओं के लिए मूलभूत लिखित व मौखिक प्रश्न
  • बच्चों के साथ अभिभावकों की उपस्थिति की अनुमति

इस प्रक्रिया का उद्देश्य बच्चों को उनकी योग्यता के अनुसार सही कक्षा में प्रवेश दिलाना है।


शिक्षकों की भूमिका: परीक्षा नहीं, मार्गदर्शन

टेस्ट के दौरान शिक्षक बच्चों को शांत और सहज रखने में जुटे रहे।
किसी बच्चे को पेंसिल पकड़ना सिखाया गया, तो किसी को प्रश्न समझाकर हल्के शब्दों में प्रोत्साहित किया गया।

सहायक प्रधानाध्यापिका स्मिता सिन्हा ने बताया—

“हम बच्चों पर किसी तरह का दबाव नहीं डालते। यह सिर्फ उन्हें समझने की प्रक्रिया है, ताकि वे सहज वातावरण में पढ़ाई शुरू कर सकें।”


अभिभावकों की प्रतिक्रिया: ‘हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में’

टेस्ट के दौरान मौजूद अभिभावकों की आंखों में उत्सुकता और भरोसा साफ दिखाई दे रहा था।

🔹 एक अभिभावक ने कहा:

“पहली बार लगा कि स्कूल बच्चों को समझने की कोशिश कर रहा है, न कि सिर्फ परीक्षा लेने आया है।”

🔹 एक अन्य अभिभावक बोले:

“ऑनलाइन आवेदन, फिर टेस्ट की स्पष्ट प्रक्रिया—सब कुछ पारदर्शी है। हमें संतोष है।”

🔹 एक मां की प्रतिक्रिया:

“मेरे बच्चे को डर नहीं लगा, क्योंकि माहौल दोस्ताना था। यही सबसे बड़ी बात है।”

अभिभावकों का मानना है कि इस तरह की मूल्यांकन प्रक्रिया बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहतर है।


ऑनलाइन एडमिशन से लेकर टेस्ट तक—पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित

श्री नारायणन एकेडमी ने पहले ऑनलाइन आवेदन प्रणाली शुरू की और अब एडमिशन टेस्ट के जरिए उसे आगे बढ़ाया है।
QR कोड, ऑनलाइन फॉर्म, डिजिटल भुगतान और अब ऑफलाइन टेस्ट—यह सब मिलकर एक संतुलित और आधुनिक एडमिशन मॉडल बनाते हैं।

विद्यालय प्रशासन के अनुसार:

  • ऑनलाइन आवेदन से रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है
  • टेस्ट से सही कक्षा निर्धारण होता है
  • अभिभावकों को पूरी जानकारी मिलती है

ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा की मजबूत पहल

ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण इलाकों में अक्सर यह धारणा रही है कि अच्छी शिक्षा केवल शहरों में ही संभव है।
लेकिन श्री नारायणन एकेडमी में हो रहा यह एडमिशन टेस्ट और पूरी प्रक्रिया इस सोच को बदलता नजर आ रहा है।

विद्यालय में—

  • आधुनिक कक्षाएं
  • प्रशिक्षित शिक्षक
  • खेल और गतिविधि आधारित शिक्षा
  • सुरक्षित और अनुशासित वातावरण

जैसी सुविधाएं बच्चों को भविष्य के लिए तैयार कर रही हैं।


बच्चों के लिए आत्मविश्वास की पहली परीक्षा

टेस्ट देने आए कई बच्चों के लिए यह पहला शैक्षणिक अनुभव था।
कुछ बच्चे शुरुआत में झिझके, लेकिन शिक्षकों और माता-पिता के सहयोग से वे आत्मविश्वास के साथ सवाल हल करने लगे।

यह अनुभव बच्चों के लिए केवल शिक्षा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक विकास की भी पहली सीख बन गया।


HF News 24 विश्लेषण

टेस्ट देते हुए बच्चों की तस्वीरें यह बताती हैं कि शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रही।
यह एक संपूर्ण प्रक्रिया बन चुकी है—जिसमें बच्चा, अभिभावक और शिक्षक तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

श्री नारायणन एकेडमी द्वारा अपनाया गया यह मॉडल:

  • बच्चों पर दबाव नहीं डालता
  • अभिभावकों में भरोसा पैदा करता है
  • शिक्षा को मानवीय दृष्टिकोण से देखता है

निष्कर्ष

श्री नारायणन एकेडमी में चल रहा एडमिशन टेस्ट केवल प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में बदलाव की तस्वीर है।
टेस्ट देते हुए बच्चों की मासूम मुस्कान, अभिभावकों की उम्मीद और शिक्षकों की संवेदनशीलता—यह सब मिलकर एक बेहतर भविष्य की नींव रख रहा है।

दारू प्रखंड में यह दृश्य बताता है कि—

“जब शिक्षा समझदारी और संवेदना के साथ आगे बढ़ती है, तब हर बच्चा आगे बढ़ सकता है।”


रिपोर्ट — HF News 24 डेस्क
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