सीओ, थाना प्रभारी, एसडीओ और डीसी तक शिकायत पहुँची – फिर भी एक महीने से नहीं हुई कोई कार्रवाई
✍️संदीप पांडेय : HF News 24 | Tatijharia
टाटीझरिया (हजारीबाग)।
हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड में एक पीड़ित परिवार न्याय के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झरपो निवासी रामलखन पांडेय (पिता – स्व. नाजिर पांडेय) द्वारा जमीन और पारिवारिक विवाद को लेकर क्रमशः हजारीबाग डीसी (08/11/2025), एसडीओ (27/11/2025), थाना प्रभारी (27/11/2025) एवं टाटीझरिया अंचलाधिकारी (01/12/2025) को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बावजूद एक महीने से अधिक समय बीत जाने पर अब तक किसी भी स्तर से न जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई।
क्या है मामला? – पैतृक भूमि पर कब्जा, घर बनाने की मनाही के बावजूद निर्माण!
भुक्तभोगी रामलखन पांडेय ने अपने आवेदन में बताया है कि उनके छोटे भाई छक्कन पांडेय (पिता – स्व. नाजिर पांडेय) ने पैतृक जमीन के कागजात अपने कब्जे में रख लिए हैं और परिवार पर दबाव बनाकर जबरन घर निर्माण कर मकान खड़ा कर लिया है।
शिकायत के अनुसार – रामलखन को भूमि के जिस हिस्से में छोड़ा गया है, वह इतना कम है कि घर बनाना तक संभव नहीं।
इसके अलावा जमा का कुआँ और खेत भी कब्जे में ले लिए गए।
रामलखन ने बताया कि जब वे अपने हिस्से की जमीन पर खेती करते हैं, तो उनके ही परिवार के लोग –
अनुज कुमार पांडेय, संतोष पांडेय, सागर पांडेय
मवेशी छोड़कर फसल नष्ट कर देते हैं तथा गाली-गलौज और मारपीट की धमकियाँ भी देते हैं।
उसी प्रकार अजय पांडेय एवं अरविंद पांडेय (पिता – बंशी पांडेय) द्वारा भी दबंगई के बल पर कब्जा, घर निर्माण और चापानल बोरिंग कराने की बात सामने आई है।
गांव वालों ने पंचायत चाही – आरोपी पक्ष ने बनाई दूरी
गांव के मुखिया, उपमुखिया, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य – सभी ने मिलकर विवाद को पंचायत में सुलझाने की कोशिशें कीं,
लेकिन आरोप है कि संबंधित पक्ष हर बार पंचायत में उपस्थित होने से इंकार करता रहा।
शिकायत के साथ ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के सत्यापित दस्तावेज और बयान भी आवेदन के साथ संलग्न किए गए हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठा सवाल – “न्याय आखिर कौन देगा?”
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों और लगातार धमकियों के बावजूद –
अब तक किसी अधिकारी ने न जांच की और न ही स्थल निरीक्षण ही किया।
पीड़ित रामलखन पांडेय ने कहा:
“हमने हर स्तर पर आवेदन दिया। डीसी, एसडीओ, थाना, सीओ – सबको लिखित शिकायत की। लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। हमें सिर्फ न्याय चाहिए।”
स्थानीय ग्रामीण भी सवाल उठा रहे हैं –
“अगर भुक्तभोगी को महीनों बाद भी सुनवाई न मिले तो आम जनता न्याय कहाँ ढूंढे?”
जन-आवाज़ – प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का जीता-जागता उदाहरण है।
जनता मांग कर रही है कि:
✔ स्थल पर अधिकारियों की टीम भेजी जाए
✔ कब्जे और धमकी के आरोपों की तत्काल जांच हो
✔ पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो
✔ कानूनी प्रक्रिया के अनुसार न्याय दिलाया जाए
समापन
यह मामला प्रशासन की संवेदनशीलता और आम नागरिकों की न्याय-प्राप्ति क्षमता पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
HF NEWS 24 इस मुद्दे को आगे भी फॉलो करेगा और जनता की आवाज़ प्रशासन तक पहुँचाता रहेगा।
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