कड़कती ठंड में झाड़ियों के बीच मिली नवजात बच्ची, गांव में सनसनी
✍️ Alok Raj| Managing Editor | HF News 24 | टाटीझरिया (हजारीबाग)
कड़कती ठंड की उस सुबह ने इंसानियत को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया, जब टाटीझरिया प्रखंड के धरमपुर प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र के समीप झाड़ियों के बीच एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली।
नन्ही-सी वह जान ठंड से कांप रही थी, हल्की-हल्की सिसकियाँ मानो अपनी माँ को पुकार रही हों। अभी उसकी आँखें भी पूरी तरह खुली नहीं थीं, लेकिन दुनिया की बेरहमी उससे पहले ही उसका सामना कर चुकी थी।
जिस बच्ची को घर की रौनक, आंगन की हंसी और परिवार की बरकत बनना था, उसे जन्म के साथ ही मौत के मुंह में छोड़ दिया गया। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।
सुबह झाड़ियों से आई सिसकियों ने खोला राज
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह के समय जब कुछ ग्रामीण स्वास्थ्य उपकेंद्र के आसपास से गुजर रहे थे, तभी झाड़ियों के बीच से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।
आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी झाड़ियों के बीच पड़ी हुई है।
कुछ ही देर में यह खबर पूरे गांव में फैल गई और ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जुट गई। हर चेहरा स्तब्ध था—कोई बच्ची को देख आंसू रोक नहीं पा रहा था, तो कोई सवाल कर रहा था कि आखिर इतनी निर्दयता कैसे संभव है।
ठंड और लापरवाही के बीच जिंदगी से संघर्ष
स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्ची को जिस हालत में छोड़ा गया था, अगर थोड़ी भी देर हो जाती तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
कड़ाके की ठंड, खुले वातावरण और लावारिस स्थिति ने उसकी हालत और नाजुक बना दी थी।
ग्रामीणों ने तत्काल बच्ची को सुरक्षित स्थान पर लाकर गर्म कपड़ों में लपेटा और स्वास्थ्य कर्मियों को सूचना दी।
सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी मौके पर पहुंचे और बच्ची की प्राथमिक जांच की।
बच्ची को तत्काल उपचार एवं देखरेख के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
सूत्रों के अनुसार, नवजात की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
गांव में आक्रोश और पीड़ा
इस घटना के बाद पूरे धरमपुर गांव और आसपास के इलाके में गहरा आक्रोश और पीड़ा देखी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि—
“अगर बच्ची नहीं चाहिए थी, तो अस्पताल या किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सकता था। इस तरह झाड़ियों में फेंक देना अमानवीय है।”
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बेटी होना आज भी क्यों अपराध?
यह घटना समाज के उस कड़वे सच को फिर उजागर करती है, जहां आज भी बेटी को बोझ समझा जाता है।
सरकार की तमाम योजनाओं, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के बावजूद ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सामाजिक मानसिकता में बदलाव अभी अधूरा है।
जिस बच्ची को लाड-प्यार, सुरक्षा और भविष्य के सपने मिलने चाहिए थे, उसे जन्म लेते ही त्याग दिया गया—सिर्फ इसलिए कि वह बेटी थी।
प्रशासनिक जांच के निर्देश
सूत्रों के अनुसार, घटना की जानकारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है।
आस-पास के क्षेत्रों में हाल के प्रसव मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि बच्ची के माता-पिता की पहचान हो सके।
प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
HF News 24 विश्लेषण
धरमपुर की यह घटना केवल एक नवजात के परित्याग की नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवेदनहीनता का आईना है।
यह सवाल खड़ा करती है कि कानून और योजनाओं से आगे बढ़कर अब सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी की जरूरत है।
समापन
झाड़ियों में मिली यह नन्ही ‘लाड़ली’ आज भले ही अपनों द्वारा ठुकरा दी गई हो, लेकिन समाज और सिस्टम की जिम्मेदारी है कि उसे सुरक्षित भविष्य और पहचान मिले।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक बच्ची का नहीं,
आने वाली पीढ़ियों की इंसानियत का है।
रिपोर्ट — HF News 24 डेस्क
सच्चाई की पहल
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इंसानियत को शर्मसार करने वाली बहुत ही दुखद खबर है । लोग समझ ही नहीं पा रहे है कि मनुष्य योनि सब योनियों में सर्वश्रेष्ठ योनि है । अगर ये बच्ची मुझे मिले तो मैं इसे पालने के लिए गोद ले सकता हु 9470961224