युवाओं के आत्मबल को मिला मंच, स्वामी विवेकानंद के विचारों ने भरी नई ऊर्जा


“चरित्र निर्माण : विकसित भारत की पृष्ठभूमि” विषय पर युवाओं को मिला प्रेरक मार्गदर्शन


विनोबा भावे विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों में आयोजित भाषण प्रतियोगिता के विजेता आज हुए सम्मानित

✍️ Pankaj Hindustani| Editor-in-Chief | HF News 24
हजारीबाग: युवाओं के प्रेरणास्रोत, महान आध्यात्मिक चिंतक एवं राष्ट्रनिर्माण के पथप्रदर्शक स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में सोमवार को एक भव्य, गरिमामय एवं प्रेरणादायी समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आज 19 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

यह आयोजन न केवल एक औपचारिक जयंती समारोह था, बल्कि युवाओं के बौद्धिक, नैतिक और चारित्रिक विकास को समर्पित एक व्यापक अभियान का समापन भी था, जो 12 जनवरी (राष्ट्रीय युवा दिवस) से प्रारंभ होकर विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी महाविद्यालयों में संचालित किया गया।


12 जनवरी से शुरू हुआ विश्वविद्यालय-स्तरीय वैचारिक अभियान

स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर विनोबा भावे विश्वविद्यालय द्वारा एक विशेष पहल करते हुए विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों में स्वामी विवेकानंद की जीवनी, विचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता 12 जनवरी से प्रारंभ होकर विभिन्न चरणों में संपन्न हुई।

इस प्रतियोगिता में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन, आत्मविश्वास, सेवा, त्याग, कर्मयोग और भारत को विश्वगुरु बनाने की उनकी परिकल्पना पर प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किए।


आज विजेताओं को किया गया सम्मानित

सोमवार को आयोजित मुख्य समारोह के दौरान भाषण प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को मंच पर आमंत्रित कर प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान पाकर विद्यार्थियों के चेहरे पर आत्मगौरव और प्रेरणा की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि छात्रों में विचारशीलता, आत्मविश्वास, नैतिक चेतना और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध विकसित करना है।


“चरित्र निर्माण : विकसित भारत की पृष्ठभूमि” विषय पर हुआ उद्घाटन सत्र

समारोह का मुख्य विषय “चरित्र निर्माण : विकसित भारत की पृष्ठभूमि” रखा गया था। इस विषय के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विकसित भारत की परिकल्पना केवल आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण से ही संभव है।

सभागार में उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं गणमान्य अतिथियों ने विषय को गंभीरता से सुना और आत्मसात किया।


मुख्य वक्ता स्वामी भावेशानंद जी महाराज का ओजस्वी संबोधन

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वामी भावेशानंद जी महाराज (रामकृष्ण मिशन, रांची) ने अपने प्रेरक एवं ओजस्वी संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन युवाओं के लिए एक जीवंत पाठशाला है।

उन्होंने कहा कि

“स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को सबसे पहले स्वयं पर विश्वास करना सिखाया। आत्मबल, अनुशासन और सेवा भाव के बिना न तो व्यक्ति महान बन सकता है और न ही राष्ट्र।”

स्वामी भावेशानंद जी महाराज ने गीता के कर्मयोग, सेवा के माध्यम से आत्मोद्धार और चरित्र निर्माण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया और तात्कालिक आकर्षणों से ऊपर उठकर जीवन के उच्च उद्देश्य को पहचानें।


कुलपति प्रो. (डॉ.) चंद्र भूषण शर्मा का प्रेरक संदेश

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) चंद्र भूषण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा लेकर डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि समाज को संस्कारवान, विचारशील और जिम्मेदार नागरिक देना भी है। उन्होंने भाषण प्रतियोगिता जैसे आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।


प्रश्नोत्तर एवं प्रशिक्षण सत्र ने बढ़ाया संवाद

समारोह के अंतर्गत चरित्र निर्माण विषयक प्रशिक्षण एवं प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसका संचालन हजारीबाग विवेकानंद युवा महामंडल द्वारा किया गया।

इस सत्र में छात्र-छात्राओं ने अपने जीवन, करियर, सामाजिक जिम्मेदारियों और नैतिक द्वंद्व से जुड़े प्रश्न रखे। वक्ताओं ने सरल, व्यवहारिक और प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।


युवाओं में दिखा विशेष उत्साह

कार्यक्रम के दौरान सभागार में अनुशासन, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा। स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित प्रस्तुतियों और वक्तव्यों ने युवाओं को गहराई से प्रभावित किया।

सम्मानित विद्यार्थियों ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा है।


आयोजन समिति ने जताया आभार

कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजन समिति के गजानन पाठक ने विश्वविद्यालय प्रशासन, सभी महाविद्यालयों, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के वैचारिक और चरित्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।


निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन न होकर युवाओं के भीतर आत्मबल, राष्ट्रप्रेम और नैतिक चेतना जगाने वाला आंदोलन सिद्ध हुआ। 12 जनवरी से शुरू हुई भाषण प्रतियोगिता और आज हुए सम्मान समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि विश्वविद्यालय शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखकर जीवन मूल्यों से जोड़ने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।


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